Raipur Breaking: फरवरी महीने की शुरुआत के साथ ही बीड़ी, सिगरेट, पान मसाला और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन करने वालों को बड़ा झटका लगने जा रहा है। केंद्र सरकार ने इन तथाकथित ‘सिन गुड्स’ पर टैक्स व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है, जो 1 फरवरी 2026 से लागू होगा। नई व्यवस्था के तहत इन उत्पादों की कीमतों में 15 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।

अब तक पान मसाला, सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ कंपेंसेशन सेस लगता था, लेकिन नई व्यवस्था में कंपेंसेशन सेस को हटाकर 40 प्रतिशत जीएसटी के ऊपर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी और हेल्थ एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस लगाया जाएगा। बीड़ी पर हालांकि 18 प्रतिशत जीएसटी ही लागू रहेगा।

नई टैक्स व्यवस्था के तहत सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1000 सिगरेट पर 2050 से 8500 रूपये तक एक्साइज ड्यूटी लगेगी। इससे एक सिगरेट की कीमत में 2 से 8.50 रूपये तक की बढ़ोतरी संभव है। छोटी सिगरेट पर करीब 2.05 रूपये प्रति स्टिक और लंबी सिगरेट पर 5.40 रूपये तक अतिरिक्त भार पड़ेगा। वहीं पान मसाला और गुटखा पर कुल टैक्स बोझ 88 से 91 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। चबाने वाले तंबाकू और जर्दा पर करीब 82 प्रतिशत एक्साइज और गुटखा पर 91 प्रतिशत तक टैक्स लगेगा।
इसके साथ ही टैक्स कैलकुलेशन का तरीका भी बदल दिया गया है। अब टैक्स पैकेट पर छपे एमआरपी के आधार पर लगेगा, न कि बिक्री मूल्य या किसी प्रकार के डिस्काउंट पर। सरकार का मानना है कि इससे टैक्स चोरी पर रोक लगेगी, हालांकि इससे कीमतों में सीधी बढ़ोतरी होगी। पान मसाला निर्माताओं के लिए नया पंजीकरण, सीसीटीवी सिस्टम और मशीनों की पूरी जानकारी देना भी अनिवार्य किया गया है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सस्ती सिगरेट 2 से 3 रूपये तक महंगी हो सकती है, जबकि प्रीमियम और लंबी सिगरेट पर प्रति स्टिक 5 से 8.50 रूपये तक का इजाफा संभव है। पान मसाला और गुटखा के पैकेट 20 से 40 प्रतिशत तक महंगे हो सकते हैं। कुल मिलाकर तंबाकू उत्पादों की कीमतों में 15 से 40 प्रतिशत तक उछाल आने की संभावना है।
छत्तीसगढ़ और रायपुर जैसे शहरों में, जहां पान मसाला और सिगरेट की खपत ज्यादा है, वहां इसका असर साफ नजर आ सकता है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि स्टॉक पहले से महंगे दामों पर मिल रहा है और नई दरें लागू होने के बाद ग्राहकों में नाराजगी बढ़ सकती है। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस फैसले को सकारात्मक बताते हुए कहते हैं कि इससे तंबाकू सेवन में कमी आएगी और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों पर अंकुश लगेगा।
