Nag Panchami 2025 : नाग पंचमी के अवसर पर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले का नागफनी गांव आस्था और चमत्कार का केंद्र बन जाता है। यहां स्थित प्राचीन नाग मंदिर को लेकर मान्यता है कि नाग देवता स्वयं दर्शन देते हैं और बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज भी यहां मन्नत से संभव है। (Dantewada snake temple)

नागवंशी राजाओं की आस्था से जुड़ा मंदिर (Nag Panchami 2025)
यह मंदिर गीदम से लगभग 10 किमी दूर नागफनी गांव (Nagfani village temple) में स्थित है। इतिहास बताता है कि 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच यहां छिंदक नागवंशी राजाओं का शासन था, जो नागों को देवता मानते थे। उन्हीं के द्वारा यह भव्य मंदिर बनवाया गया। मंदिर के कारण ही गांव का नाम ‘नागफनी’ पड़ा।
नागों को मारना पाप
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि इस गांव में नागों को मारना वर्जित है। यहां के लोग अपने सरनेम में भी “नाग” लगाते हैं। यदि कोई व्यक्ति अनजाने में नाग को नुकसान पहुंचा देता है, तो वह मंदिर आकर क्षमा मांगता है और धातु से बना सांप चढ़ाता है।

खुजली, निःसंतान, घरेलू कलह, मासिक धर्म से जुड़ी समस्या होती है दूर
यह मंदिर चर्म रोग (खुजली), मासिक धर्म की अनियमितता, निःसंतानता और घरेलू कलह जैसी समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए मन्नत स्थल है। स्थानीय पुजारी के अनुसार, कई बार नाग देवता स्वयं मंदिर में दर्शन देते हैं, विशेषकर सोमवार के दिन।
एक गांव घोटपाल के परिवार को खुजली की गंभीर बीमारी हो गई थी। उन्होंने यहां मन्नत मांगी और बीमारी से मुक्त हो गए। निःसंतान दंपति भी यहां संतान की प्राप्ति के लिए मन्नत मांगते हैं।
नाग पंचमी पर मेला
हर साल नाग पंचमी के अवसर पर यहां विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और मेले का आयोजन होता है। सैकड़ों श्रद्धालु दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में सांपों के जोड़े भी दिखाई देते हैं, जो किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते।
मासिक धर्म से जुड़ी बीमारी भी होती है दूर
वहीं, जिन महिलाओं को मासिक धर्म की समस्या रहती है, वे भी इस मंदिर में मन्नत मांगती हैं. पुजारी की मानें तो यहां बीमारियों के अलावा पारिवारिक समस्या भी दूर होती है. निःसंतान दंपती भी यहां संतान के लिए मन्नत मांगते हैं. नाग पंचमी के दिन यहां कई कार्यक्रम होते हैं.
