CG Child Rape: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में 7 साल की दो मासूम बच्चियों से दुष्कर्म का मामला सामने आया है। आरोप है कि 17 वर्षीय एक नाबालिग लड़के ने चॉकलेट देने का लालच देकर दोनों बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया और उनके साथ मारपीट भी की। मामले में पीड़ित परिवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए लापरवाही, जांच में देरी और आरोपी पक्ष को संरक्षण देने के आरोप लगाए हैं।![]()
चॉकलेट का लालच देकर करता था रेप
पीड़ित परिवार के अनुसार आरोपी नाबालिग कई से चॉकलेट खिलाने का बहाना बनाकर बच्चियों के साथ गलत हरकत कर रहा था। पीड़ित बच्चियों की मां ने आरोप लगाया है कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई नहीं की और आरोपी को पकड़ने के बजाय उसके परिजनों से बातचीत करती रही। परिजनों का कहना है कि गिरफ्तारी में देरी की गई और मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया।
बच्चियों को रस्सी से बांधकर रखता था
पीड़ित पक्ष के अनुसार आरोपी नाबालिग कई दिनों से बच्चियों को चॉकलेट का लालच देकर अपने पास बुलाता था। 27 मई को परिजनों ने उसे कथित रूप से रंगे हाथ पकड़ लिया। परिवार का आरोप है कि आरोपी बच्चियों को रस्सी से बांधकर रखता था और उनके साथ मारपीट भी करता था।
परिजनों का कहना है कि घटना से जुड़े सामान और अन्य संभावित साक्ष्यों की जानकारी पुलिस को दी गई थी, लेकिन समय पर उन्हें जब्त नहीं किया गया। इससे महत्वपूर्ण सबूत नष्ट होने की आशंका जताई जा रही है।
वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुई रिपोर्ट
घटना की जानकारी देने के बाद भी सिरगिट्टी पुलिस ने तत्काल FIR दर्ज नहीं की। पीड़ित परिवार सुबह से देर रात तक थाने और अधिकारियों के चक्कर काटता रहा। हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई।
आरोप लगाया गया है कि घटना के बाद बच्चियों का मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें उनके निजी अंगों में दर्द होने की पुष्टि हुई और संकेत मिले। इसके बावजूद पुलिस मामले को शुरू से ही कमजोर करने की कोशिश कर रही है। मासूम बच्चियों से बार-बार पूछताछ कर उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। पुलिस ने आरोपी का मेडिकल ‘नील’ कर दिया है।
समझौता करने का दबाव बना रहे पुलिस
पीड़ित बच्ची की मां ने शिकायत की थी थाना प्रभारी और जांच अधिकारी केस की निष्पक्ष जांच करने के बजाय मामले को दबाने और समझौते का दबाव बना रहे हैं। पुलिस पीड़ित परिवार से कह रही है कि आरोपी तो पड़ोस का ही रहने वाला और जान-पहचान का लड़का है, इसलिए मामले को यहीं रफा-दफा कर लो।
जांच अधिकारी बदले
शिकायत के बाद एसएसपी रजनेश सिंह ने ASI शीतला प्रसाद त्रिपाठी को बिलासपुर लाइन अटैच कर दिया है। DSP अनिता प्रभा मिंज के छुट्टी पर रहने की वजह से उनकी जगह पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रश्मित कौर चावला (आईयूसीएडब्ल्यू) को जांच का जिम्मा सौंपा है।
आरोपी पक्ष को वीआईपी ट्रीटमेंट
पीड़ित पक्ष ने ये भी कहा था कि थाने में आरोपी की मां को बैठाकर रखा गया और उन्हें पुलिस की तरफ से विशेष सुविधाएं दी जा रही है। उन्होंने टीआई और स्टाफ पर आरोपी को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
उनका कहना है कि पुलिस पीड़ित पक्ष को धूप में बिठाती है, जबकि आरोपी के साथ अच्छा व्यवहार किया जा रहा है। उसके परिवार के लोग उससे तीन-तीन बार मिलने आ रहे हैं। जिससे जांच की पारदर्शिता संदिग्ध हो गई है। आरोपी पक्ष की तरफ से पीड़ित परिवार को लगातार धमकियां दी जा रही हैं, जिससे बच्चियों और पूरे परिवार डरे हुए हैं।
पीड़ित परिवार की 7 मांगें
• इस केस की जांच किसी बड़े और स्वतंत्र पुलिस अधिकारी से कराई जाए।
• घटना से जुड़े सभी सामान तुरंत जब्त कर उनकी सही तरीके से जांच हो।
• एफआईआर लिखने में देरी और सबूत जुटाने में लापरवाही बरतने वालों की अलग से जांच की जाए।
• सिरगिट्टी थाना प्रभारी अभय सिंह बैस, सब इंस्पेक्टर शीतल प्रसाद त्रिपाठी और जांच अधिकारी संतोषी अग्रवाल की भूमिका की जांच हो और इन्हें पद से हटाया जाए।
• जब तक जांच पूरी न हो, तब तक इन अधिकारियों को इस केस से पूरी तरह दूर रखा जाए।
• पीड़ित बच्चियों और उनके परिवार को तुरंत पुलिस सुरक्षा दी जाए।
• मामले की बिना किसी भेदभाव के समय पर जांच कर दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।




