CG News: पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर के मुद्दे पर केंद्र सरकार की घोषित नीति को छत्तीसगढ़ में भी लागू करने की मांग की है। उन्होंने प्रदेश के भाजपा सांसदों से इस विषय पर स्पष्ट पहल करने का आग्रह करते हुए कहा कि संसद में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने अप्रैल 2026 में कहा था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर पूरी तरह वैकल्पिक व्यवस्था है और किसी भी उपभोक्ता पर इसे जबरन नहीं लगाया जा सकता।![]()
उपभोक्ताओं की सहमति जरूरी
मोहम्मद अकबर ने कहा कि यदि संसद में केंद्र सरकार का यही आधिकारिक रुख है तो छत्तीसगढ़ में भी उसी नीति का पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की सहमति या अनुमति के बिना सामान्य बिजली मीटर को स्मार्ट मीटर में बदलना उचित नहीं है और उपभोक्ताओं के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।
प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं का मुद्दा
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लगभग 65 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें करीब 45 लाख घरेलू और 7.4 लाख कृषि उपभोक्ता शामिल हैं। इतने बड़े वर्ग को प्रभावित करने वाले निर्णय पारदर्शिता, सहमति और विश्वास के आधार पर लिए जाने चाहिए।
पूर्व मंत्री ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से स्मार्ट मीटर को लेकर विरोध की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने कबीरधाम जिले के पांडातराई क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर हटाकर बिजली कार्यालय में जमा कर अपना विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि लोगों की आशंकाओं का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए।
स्मार्ट मीटर वैकल्पिक हैं
मोहम्मद अकबर ने छत्तीसगढ़ के भाजपा सांसदों से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे पर स्पष्ट पहल करें और केंद्र सरकार द्वारा संसद में व्यक्त नीति को राज्य में लागू कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि यदि स्मार्ट मीटर वैकल्पिक हैं तो किसी भी उपभोक्ता पर इन्हें अनिवार्य रूप से नहीं थोपा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के बिजली उपभोक्ता यह जानना चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ के भाजपा सांसद इस मुद्दे पर क्या कदम उठा रहे हैं। यदि अन्य राज्यों में उपभोक्ताओं की चिंताओं को महत्व दिया जा सकता है तो छत्तीसगढ़ के उपभोक्ताओं की मांगों और आशंकाओं को भी समान महत्व मिलना चाहिए।

