Raipur News: रायपुर के कारोबारी महेंद्र गोयनका को कोलकाता पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है। उन पर मध्यप्रदेश के विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनियों में करीब 1000 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी और कंपनियों पर अवैध कब्जे की कोशिश का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद अदालत ने उन्हें 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
ऐसे शुरू हुआ मामला
जानकारी के अनुसार भाजपा विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनी यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का मुख्यालय कोलकाता में है। महेंद्र गोयनका पहले इस कंपनी में प्रबंधन के अहम पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी और सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज और हस्ताक्षरों के जरिए कंपनी के दो निदेशकों को हटाकर उनकी जगह चार अन्य लोगों को नियुक्त कर दिया। इसके बाद कंपनी के नियंत्रण पर कब्जा करने और वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम देने की कोशिश की गई।
कोलकाता में दर्ज हुई थी FIR
मामले में वर्ष 2024 में कोलकाता में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और फर्जी दस्तावेज तैयार करने समेत विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसी मामले में कोलकाता पुलिस ने महेंद्र गोयनका को दिल्ली से गिरफ्तार किया। अब पुलिस रिमांड के दौरान पूरे वित्तीय नेटवर्क और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच की जाएगी।
कटनी में भी दर्ज हैं मामले
कंपनी से जुड़े विवाद के बाद कटनी निवासी पूर्व निदेशकों ने कटनी कोतवाली और माधवनगर थाने में भी जालसाजी और धोखाधड़ी के मामले दर्ज कराए थे। इन मामलों में महेंद्र गोयनका के अलावा रायपुर निवासी हिमांशु श्रीवास्तव, सन्मति जैन, सुनील अग्रवाल और अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
अग्रिम जमानत याचिकाएं हुईं खारिज
जानकारी के अनुसार आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं निचली अदालत, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक खारिज हो चुकी हैं। इसके बावजूद कुछ आरोपी लंबे समय से फरार बताए जा रहे हैं। उनकी तलाश जारी है।
NCLT ने भी की थीं टिप्पणियां
9 मई 2025 को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण की मुंबई पीठ ने महेंद्र गोयनका और उनकी पत्नी मीनू गोयनका से जुड़े वित्तीय लेनदेन पर गंभीर टिप्पणियां की थीं। इसके अलावा उनकी एक अन्य कंपनी से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के मामलों की भी जांच चल रही है।
कौन हैं महेंद्र गोयनका?
महेंद्र गोयनका मूल रूप से मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के कोतमा के निवासी हैं और वर्तमान में रायपुर में कारोबार करते हैं। वे पहले यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में प्रबंधन से जुड़े पद पर कार्यरत थे। बाद में कंपनी के नियंत्रण, फर्जी दस्तावेज, वित्तीय अनियमितताओं और करीब 1000 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी के आरोपों को लेकर विवादों में आए।



