CG News: तालाब किनारे मिले मगरमच्छ के 6 बच्चे, देखकर चौंक गए लोग

CG News: तालाब किनारे मिले मगरमच्छ के 6 बच्चे, देखकर चौंक गए लोग

CG News: छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर के रतनपुर स्थित ऐतिहासिक बिकमा तालाब में शनिवार सुबह तालाब के किनारे एक गड्ढे में मगरमच्छ के 6 बच्चे दिखाई दिए। स्नान करने पहुंचे लोगों ने बच्चों को देखा और तत्काल पुलिस व वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची टीम ने सभी बच्चों का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें खूंटाघाट बांध में छोड़ दिया। (रतनपुर तालाब मगरमच्छ के बच्चे)tcw

नहाने पहुंचे लोगों ने देखा मगरमच्छ के बच्चे

जानकारी के मुताबिक, रोजाना की तरह सुबह स्थानीय लोग बिकमा तालाब में नहाने गए थे। इसी दौरान उनकी नजर तालाब किनारे एक गड्ढे में मौजूद मगरमच्छ के बच्चों पर पड़ी। अचानक मगरमच्छ के बच्चों को देखकर लोग चौंक गए। इसके बाद ग्रामीणों ने सावधानी बरतते हुए बच्चों को सुरक्षित स्थान पर रखा और तत्काल वन विभाग तथा पुलिस को सूचना दी। (बिकमा तालाब मगरमच्छ के बच्चे)

वन विभाग ने किया रेस्क्यू

सूचना मिलते ही वन विभाग और रतनपुर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से सभी 6 मगरमच्छ के बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। बाद में उन्हें वन विभाग की निगरानी में खूंटाघाट बांध ले जाकर प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया।

बिकमा तालाब में पहले से मौजूद हैं मगरमच्छ

वार्ड पार्षद मनोज पाटले ने बताया कि बिकमा तालाब में वर्तमान में तीन बड़े मगरमच्छ मौजूद हैं, जिनकी निगरानी वन विभाग द्वारा की जाती है। माना जा रहा है कि मादा मगरमच्छ ने तालाब किनारे अंडे दिए थे, जिनसे हाल ही में बच्चों का जन्म हुआ है। वन विभाग की टीम क्षेत्र में लगातार निगरानी बनाए हुए है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।

250 साल से अधिक पुराना है बिकमा तालाब

रतनपुर का ऐतिहासिक बिकमा तालाब लगभग 250 वर्ष से अधिक पुराना माना जाता है। इसका निर्माण छत्तीसगढ़ में मराठा शासन के दौरान विंबाजी राव भोसले द्वारा कराया गया था। यह तालाब क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है।

भगवान राम की प्रतिमा मिलने की है मान्यता

स्थानीय लोगों के बीच यह मान्यता प्रचलित है कि तालाब की खुदाई के दौरान भगवान राम की एक प्रतिमा प्राप्त हुई थी, जिसे वर्तमान में रामटेकरी स्थित श्रीराम मंदिर में स्थापित किया गया है। हालांकि पुरातत्ववेत्ता राहुल सिंह का कहना है कि इस संबंध में उनके पास कोई प्रामाणिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह स्थानीय आस्था से जुड़ा विषय है।

 

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