Mahasamund Dhan Ghotala: कवर्धा जिला के बाद अब महासमुंद जिला के बागबाहरा स्थित धान संग्रहण केंद्र में करोड़ों के धान के गायब होने का मामला सामने आया है। संग्रहण केंद्र से करीब 18,433 क्विंटल धान गायब मिला है, जिससे सरकार को लगभग 5.71 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। संग्रहण केंद्र के संचालक ने धान के नुकसान के लिए चूहे, दीमक और चिड़ियों को जिम्मेदार ठहराया है।
जानकारी के अनुसार, बागबाहरा धान संग्रहण केंद्र में धान के स्टॉक में 3.65 प्रतिशत की कमी पाई गई है। नियमों के अनुसार, 2 प्रतिशत से अधिक की कमी होने पर तत्काल निलंबन, विभागीय जांच और एफआईआर का प्रावधान है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

जानकारों का कहना है कि यह मामला लापरवाही या भ्रष्टाचार से जुड़ा हो सकता है, क्योंकि धान के सुरक्षित भंडारण के लिए प्रशासन द्वारा मार्कफेड के माध्यम से करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसमें परिवहन, हेमाली और सुरक्षा व्यवस्था शामिल होती है। ऐसे में चूहों, दीमक और पक्षियों को इतनी बड़ी मात्रा में धान नुकसान का जिम्मेदार बताना संदेह पैदा करता है।
संरक्षण विभाग के सचिव द्वारा 12 सितंबर 2024 को जारी पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि 1 प्रतिशत तक कमी पर कारण बताओ नोटिस, 1 से 2 प्रतिशत पर विभागीय जांच और 2 प्रतिशत से अधिक पर निलंबन व एफआईआर दर्ज की जाए। इसके बावजूद बागबाहरा केंद्र में अब तक सख्त कार्रवाई नहीं हुई है।

बागबाहरा धान संग्रहण प्रभारी का कहना है कि वर्ष 2024-25 में केंद्र में 12.63 लाख बोरा धान आया था। आवक के समय धान में 17 प्रतिशत नमी थी, जबकि जावक के समय नमी 10 से 11 प्रतिशत रह गई। उन्होंने धान के नुकसान के लिए कीट, चूहे और पक्षियों को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, DMO ने बताया कि शॉर्टेज को लेकर संग्रहण केंद्र प्रभारी को विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि हाल ही में कवर्धा जिले में भी करीब 7 करोड़ रुपये के धान के नुकसान के लिए चूहों को जिम्मेदार बताया गया था।
