Balod Transgender Case: बालोद जिले से इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। डौंडी ब्लॉक के ग्राम ठेमाबुजुर्ग में गांव लौटकर मेले में शामिल होने आई एक किन्नर (थर्ड जेंडर) के साथ गांव के कुछ युवकों ने अश्लील हरकतें कीं, गाली-गलौज की और मारपीट की। विरोध करने पर पीड़िता और उसके साथी दोनों को चोटें आईं। पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
“साल में एक बार घर आती हूं, फिर भी ताने और गालियां झेलनी पड़ती हैं”
मैं सब सहती रही। शाम को मेले से घर लौट रही थी, तभी रास्ते में गांव के तीन लोगों ने मुझे कहा – छक्का, यहां क्या करने आई है? जब मैंने पलटकर जवाब दिया, तो लोग मेरे खिलाफ हो गए। मुझे पीटा गया, मेरे साथ आए दोस्त को भी मारा गया। लेकिन मैं थर्ड जेंडर (किन्नर) हूं – इसमें मेरा क्या कसूर?
रायपुर के सरोना की रहने वाली आइशा तृतीय लिंग समुदाय से है। आइशा मूल रूप से बालोद जिले के डौंडी ब्लॉक के ग्राम ठेमाबुजुर्ग की रहने वाली है।
12 वीं तक गांव में पढ़ाई करने के बाद, जब उसे लगा कि वह यहां अपने आप को एडजस्ट नहीं कर पा रही है, तो वह अपने जैसे अन्य साथियों के पास सरोना रायपुर के गरिमा गृह चली गई। साल 2021 से वह वहीं रह रही है।

छक्का कहने से मना करने पर मारा
पूरा मामला 27 अक्टूबर का है। पीड़िता ने बताया कि वह अपने दोस्त पवित्रा के साथ ठेमाबुजुर्ग में मेला-मंडाई घूम रही थी। इसी दौरान मंदिर के पास गांव के कुछ युवक गंदे शब्द बोलते हुए आपत्तिजनक इशारे करने लगे।
दोनों ने इस बात को नजरअंदाज कर आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन शाम 6.50 बजे जब वे दशराज दुकान के सामने पहुंचे, तब गांव के महेश पटेल, जीवन नेताम और गोपी नेताम उनसे मिले।
पीड़िता ने बताया कि तीनों युवकों ने आपत्तिजनक शब्द बोलना शुरू कर दिया। जब उसने और उसके साथी ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने अश्लील गालियां दीं और कहा – छक्का, यहां क्या करने आए हो? इसके बाद तीनों ने मारपीट करना शुरू कर दिया।
इस दौरान उसके सर में चोट लगी, जबकि उसके साथी को माथे में चोट आई है। जब मारपीट की जानकारी आइशा के परिजनों को लगी, तो वे मौके पर पहुंचे और दोनों को वहां से ले गए। इसके बाद डौंडी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है।

लोगों के नजरिए और तानों से दूर रहना चाहती हूं – आइशा
आइशा ने बताया कि उन्होंने 12 वीं तक गांव में रहकर पढ़ाई की है। इस दौरान उन्हें लोगों के नजरिए और तानों का शिकार होना पड़ा। लोगों की हरकतों से तंग आकर और समाज से अलगाव की वजह से वह 2021 में अपना गांव छोड़कर गरिमा गृह चली गई।
इस संस्था के मार्गदर्शन में वह बालको, कोरबा में सुरक्षा का कार्य जिम्मेदारी से संभाल रही हैं। महिला और पुरुषों के बराबर काम कर उन्होंने अपनी क्षमता को लोगों के सामने रखा।
आइशा कहती हैं कि संविधान में भले ही हमारे लिए सम्मान और अधिकार की बातें लिखी गई हों, लेकिन असल जिंदगी में ये सभी दावे खोखले हैं। हम आज भी समाज में अपने सम्मान के साथ जीने का अधिकार ढूंढ रहे हैं।
मामला दर्ज
इस मामले पर डौंडी टीआई उमा ठाकुर ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामले को गंभीरता से लेते हुए बीएनएस की धारा 115(2), 296, 3(5) और 351(3) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आगे की कार्रवाई जारी है।
