बिलासपुर जिले में खरीफ सीजन की शुरुआत में ही किसानों को खाद की किल्लत की समस्या से जूझना पड़ रहा है। धान की बोआई के बीच किसानों को खाद के लिए सोसाइटी से लेकर जिला मुख्यालय का चक्कर काटना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि सोसाइटी में DAP की कमी हो गई है। ऐसे में कृषि विभाग के अफसर किसानों को DAP की जगह सिंगल सुपर फास्फेट और पोटाश का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है।

वहीं आम आदमी पार्टी के नेताओं ने किसानों को नकली खाद और बीज दिए जाने का आरोप लगाते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।
दरअसल, मानसून आने के साथ ही जिले के किसान खेतों में खरीफ सीजन के लिए धान की बुआई में जुट गए हैं। धान की बोआई से पहले किसान खेतों में खाद का प्रबंधन भी कर रहे है, जिसके लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
बता दें कि जिले में खरीफ सीजन के लिए करीब 10 हजार मीट्रिक टन DAP की जरूरत होती है। लेकिन, जिले में अब तक महज 2 हजार मीट्रिक टन ही DAP की सप्लाई की गई है। ऐसे में किसानों को धान का फसल लगाने से पहले DAP जैसे खाद के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बेहतर उत्पादन के लिए DAP जरूरी
किसानों का कहना है कि बेहतर फसल के लिए DAP की आवश्यकता ज्यादा होती है। विशेषकर खुर्रा बोनी और रोपाई के लिए DAP खाद डालने से पैदावार अधिक होता है और फसल में कीट का प्रकोप नहीं होता। यही वजह है कि ज्यादातर किसान DAP की डिमांड कर रहे हैं। DAP खाद नहीं मिलने कारण उनकी बोआई प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर पैदावार पर पड़ने की आशंका है।
2 हजार मिट्रिक टन खाद की हो सकती है सप्लाई
कृषि विभाग के अफसरों का कहना है कि इस बार युद्ध की स्थिति के कारण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर DAP की आपूर्ति बाधित हुआ है। छत्तीसगढ़ ही नहीं देश भर में DAP का आयात प्रभावित हुआ है।
आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में 2 हजार मीट्रिक टन DAP मिल सकता है। लेकिन, इसके बावजूद मांग के अनुरूप केवल 40% आपूर्ति हो सकती है। ऐसे में किसानों को DAP के विकल्प के तौर पर दूसरे खाद का उपयोग करना चाहिए।
सोसाइटी का चक्कर काट रहे किसान
जिला पंचायत सदस्य शिवेन्द्र कौशिक ने बताया कि जिले में ज्यादातर सोसाइटी में DAP खाद नहीं है। इस संबंध में DAP के साथ ही यूरिया सप्लाई के लिए लगातार अफसरों से मांग की जा रही है। लेकिन, खाद उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण किसानों में आक्रोश है।
कलेक्टर का आदेश बेअसर
बीते दिनों कलेक्टर संजय अग्रवाल ने टीएल की बैठक में जिला सहकारी बैंक के साथ ही कृषि विभाग के अफसरों को निर्देशित किया था कि जिले के किसानों को खाद-बीज की कमी नहीं होनी चाहिए। लेकिन, इसके बाद भी किसान खाद के लिए दर-दर भटक रहे हैं। खाद को लेकर समिति प्रबंधकों और किसानों के बीच विवाद की स्थिति भी बन रही है।
जिला सहकारी बैंक के सीईओ सुनील सोढ़ी ने बताया कि राज्य सरकार से खाद की मांग की थी। लेकिन जितनी मांग की गई थी, उससे काफी कम खाद मिला है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष डीएपी खाद मार्केट में उपलब्ध नही होने के कारण खाद नहीं मिल पा रही है, जिसकी वजह से किसानों को भी खाद उपलब्ध नही हो पा रही है।
सुपरफॉस्फेट और पोटाश उपयोग करने की सलाह
खाद की समस्या को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को ऑप्शनल उर्वरकों का इस्तेमाल की सलाह दी है। विभाग द्वारा DAP के विकल्प के रूप में NKP, यूरिया और सिंगल सुपरफॉस्फेट जैसे उर्वरकों को अपनाने की बात कही जा रही है। ताकि फसलों को पोषक तत्व मिलता रहे और उत्पादन पर असर न पड़े।
कृषि अधिकारी बोले- सभी जगह समस्या
कृषि विभाग के उप संचालक पीडी हथेश्वर का कहना है कि बिलासपुर ही नहीं प्रदेश भर में DAP की किल्लत है। इसलिए किसानों को ऑप्शनल उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। ताकि फसलों को आवश्यक पोषक तत्व मिलता रहे। विभाग प्रयासरत है कि सप्लाई बढ़ाई जाए। इसके लिए डिमांड भी की गई है।
आम आदमी पार्टी ने लगाए गंभीर आरोप
आम आदमी पार्टी का कहना है कि सहकारी समितियों में डीएपी खाद की कमी है और निजी विक्रेता अमानक बीज बेच रहे हैं। लगभग सभी समितियों में खाद की कमी है। जिले में किसानों को झांसा देकर नकली खाद और बीज थमाने का खेल शुरू हो गया है।
जिम्मेदार विभाग के मैदानी अमले की मिलीभगत से यह सारा खेल चल रहा है। निजी प्रतिष्ठानों में खाद बेच रहे व्यापारी निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूल कर रहे हैं। धान सहित अन्य बीज भी तय कीमत से अधिक दर पर बेचे जा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद अधिकारी कार्रवाई नहीं करते हैं। 300 से ज्यादा गावों में खाद और बीज की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है। जिससे किसानों को दर-दर भटकना पड़ रहा है।
