CG Kisan Protest: छत्तीसगढ़ में भारतीय किसान संघ ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेशभर में आंदोलन किया। प्रदेश के कई जिलों में किसानों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा।
कवर्धा में किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ रैली निकाली। प्रदर्शन के दौरान जगह-जगह बैरिकेडिंग लगाकर रास्ते बंद किए गए। रैली के बाद किसान टेंट लगाकर कीर्तन-भजन करते नजर आए। सड़क पर जाम की स्थिति बनने से लोगों को परेशानी हुई। इस दौरान मरीज को लेने जा रही एंबुलेंस भी जाम में फंस गई, हालांकि बाद में उसे रास्ता दिया गया।
किसानों ने बकाया भुगतान, धान खरीदी, समर्थन मूल्य, सिंचाई, बिजली, गन्ने के दाम, गौवंदन योजना और भूमि अधिग्रहण सहित कई मुद्दों को लेकर आवाज उठाई। संघ ने किसानों के करीब 1700 करोड़ रुपए के लंबित भुगतान को जल्द जारी करने की मांग की।
बलरामपुर में किसानों ने निकाली रैली
बलरामपुर में किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली। रैली हिंदू चौक से शुरू होकर कलेक्टर कार्यालय पहुंची, जहां मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। किसानों ने बरवाडीह-चिरमिरी रेल लाइन का पुराना सर्वे लागू करने, बिजली विभाग के निजीकरण पर रोक लगाने और खाद की अधिक कीमत पर बिक्री रोकने सहित कई मांगें रखीं।
बिलासपुर में 12 तहसीलों के किसान पहुंचे
बिलासपुर में भारतीय किसान संघ के प्रदर्शन में जिले की 12 तहसीलों से किसान शामिल हुए। किसानों ने रैली निकालकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को 12 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में महिलाओं ने भी भाग लिया।
किसान नेताओं ने कहा कि समर्थन मूल्य बढ़ने के बाद भी किसानों को उसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने सरकार से किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
धान खरीदी व्यवस्था में सुधार की मांग
भारतीय किसान संघ ने धान खरीदी के दौरान होने वाली कटौती को बंद करने की मांग की है। संघ का कहना है कि प्रति बोरी अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम ही धान लिया जाए और किसानों की उपज में अतिरिक्त वजन लेने की व्यवस्था खत्म की जाए।
इसके साथ ही टोकन व्यवस्था में सुधार करते हुए बड़े किसानों के लिए 5 टोकन, छोटे किसानों के लिए 3 और सीमांत किसानों के लिए 1 टोकन की व्यवस्था करने की मांग की गई है।
बाढ़ प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग
किसान संघ ने हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित किसानों के खेतों का सर्वे कर जल्द मुआवजा देने की मांग की है। संघ का कहना है कि केवल कागजी कार्रवाई से किसानों की समस्या दूर नहीं होगी, सरकार को जमीन पर जाकर नुकसान का आकलन करना चाहिए।
खाद की उपलब्धता और सिंचाई व्यवस्था सुधारने की मांग
किसानों ने निर्धारित कीमत पर खाद उपलब्ध कराने और अधिक कीमत पर खाद बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को जल्द पूरा करने और लंबित योजनाओं को गति देने की बात कही गई है।
गन्ना और अन्य फसलों के लिए समर्थन मूल्य की मांग
भारतीय किसान संघ ने गन्ने के मूल्य में 150 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ोतरी करने और इसे कृषक उन्नति योजना से जोड़ने की मांग की है। इसके अलावा मक्का और गेहूं की भी समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने की मांग रखी गई है।
भूमि अधिग्रहण में किसानों के हितों की रक्षा की मांग
संघ ने भूमि अधिग्रहण के मामलों में किसानों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है। किसान नेताओं ने कहा कि विकास कार्यों के नाम पर किसानों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
15 नवंबर से 15 फरवरी तक धान खरीदी की मांग
किसान संघ ने धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से 15 फरवरी तक निर्धारित करने की मांग की है। साथ ही खरीदी केंद्रों की व्यवस्था और टोकन प्रणाली में सुधार की मांग भी रखी गई है।
सड़क से लेकर शासन तक आंदोलन की चेतावनी
भारतीय किसान संघ ने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, लेकिन किसान आज भी अपनी उपज का सही मूल्य, खाद और राहत के लिए संघर्ष कर रहा है। संघ ने सरकार से 12 सूत्रीय मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।





