CG News: धर्म स्वातंत्र्य कानून राजपत्र में प्रकाशित, जानिए सजा का प्रावधान

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CG News: छत्तीसगढ़ में जबरन और प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण पर रोक लगाने के उद्देश्य से पारित छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक अब कानून बन गया है। 19 मार्च को विधानसभा में पारित इस विधेयक पर 6 अप्रैल को राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद इसे राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है, जिससे यह पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गया है।

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यह विधेयक उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किया गया था, जिसे विस्तृत चर्चा के बाद पारित किया गया। सरकार का कहना है कि 1968 से लागू पुराने प्रावधान वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप पर्याप्त नहीं थे, इसलिए नए कानून की आवश्यकता महसूस की गई।

 

धर्म परिवर्तन के लिए तय होगी प्रक्रिया

नए कानून के तहत धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को पहले प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष आवेदन देना होगा। इसके बाद निर्धारित समय सीमा में इसकी सार्वजनिक सूचना जारी की जाएगी और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। जांच पूरी होने के बाद ही प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।

साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी इच्छा से धर्म चुनने की स्वतंत्रता होगी, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाएगा कि धर्म परिवर्तन किसी दबाव, प्रलोभन या भय के कारण न हो।

संस्थाओं के लिए पंजीयन अनिवार्य

धर्मांतरण से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए पंजीयन अनिवार्य किया गया है। उन्हें हर साल प्राधिकृत अधिकारी को विस्तृत रिपोर्ट देना होगी। ग्राम सभा को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

विवाह के आधार पर धर्मांतरण मान्य नहीं

कानून में स्पष्ट किया गया है कि विवाह को धर्मांतरण का आधार नहीं माना जाएगा। विवाह के बाद भी धर्म परिवर्तन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा।

कड़े दंड का प्रावधान

अवैध धर्मांतरण के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान किया गया है-

• सामान्य अवैध धर्मांतरण: 7 से 10 साल की सजा और न्यूनतम 5 लाख रुपए जुर्माना
• महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति-जनजाति से जुड़े मामलों में: 10 से 20 साल की सजा और न्यूनतम 10 लाख रुपए जुर्माना
• सामूहिक धर्मांतरण: 10 साल से आजीवन कारावास और न्यूनतम 25 लाख रुपए जुर्माना
• भय, प्रलोभन या धन के जरिए धर्मांतरण: 10 से 20 साल की सजा और भारी जुर्माना
• दोबारा अपराध करने पर: आजीवन कारावास

पीड़ित को मिलेगा मुआवजा

कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन दबाव या धोखे से कराया गया है, तो उसे पीड़ित माना जाएगा। ऐसे मामलों में अदालत आरोपी को पीड़ित को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दे सकती है।

इन मामलों की जांच उप निरीक्षक या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाएगी। साथ ही, मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालय अधिसूचित किए जाएंगे। इस कानून के तहत प्रमाण का भार आरोपी पर होगा।

 

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