Raipur Fraud: राजधानी रायपुर में खुद को गृहमंत्री का निजी सहायक बताकर सरकारी नौकरी और ट्रांसफर कराने का झांसा देकर लाखों रुपए की ठगी करने वाले दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपियों ने करीब 15 लोगों से लगभग 25 लाख रुपए की ठगी की है। मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है।
पुलिस के अनुसार, आकाशवाणी सिविल लाइंस निवासी बोस्टो तांडी आरक्षक भर्ती की तैयारी कर रहा था। नवंबर 2025 में उसकी मुलाकात संतराम यादव से हुई। संतराम ने दावा किया कि उसकी गृहमंत्री के निजी सहायक से पहचान है और पैसे देकर नौकरी लगवाई जा सकती है।
इसके बाद सर्किट हाउस स्थित कॉफी हाउस में उसकी मुलाकात आदित्य मोहन पंडा से कराई गई। आदित्य ने खुद को गृहमंत्री का निजी सहायक बताते हुए पहचान पत्र दिखाया और नौकरी दिलाने के नाम पर दो लाख रुपए की मांग की। बोस्टो ने भरोसा कर 70 हजार रुपए नकद दे दिए।
नौकरी नहीं लगी, पैसे लौटाने में करता रहा टालमटोल
भर्ती परीक्षा का परिणाम आने पर बोस्टो का चयन नहीं हुआ। उसने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपी लगातार बहाने बनाता रहा। बाद में 70 हजार रुपए का चेक दिया, लेकिन उसे बैंक में जमा नहीं करने की सलाह देकर समय टालता रहा।
जांच में खुला बड़ा फर्जीवाड़ा
बाद में बोस्टो को जानकारी मिली कि आदित्य मोहन पंडा गृह विभाग में किसी भी पद पर नहीं है और उसने कई अन्य लोगों से भी नौकरी और ट्रांसफर के नाम पर पैसे लिए हैं। इसके बाद 6 अक्टूबर 2026 को सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।
15 लोगों से 25 लाख रुपए लेने की बात स्वीकार
पुलिस ने आदित्य मोहन पंडा और संतराम यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में दोनों ने करीब 15 लोगों से लगभग 25 लाख रुपए लेने की बात स्वीकार की है। पुलिस को आशंका है कि ठगी के और भी मामले सामने आ सकते हैं।
दोनों आरोपी गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों में कमल विहार निवासी आदित्य मोहन पंडा (23) और देवपुरी निवासी संतराम यादव (38) शामिल हैं। सिविल लाइन थाना पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।


