CG Water Conservation: छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर नंबर-1 रैंक मिली है। वहीं सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम जिले देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।![]()
नई दिल्ली में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण मॉडल और जनभागीदारी आधारित प्रयासों को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। सम्मेलन में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी साझा की।
जल संरक्षण बना जनभागीदारी का अभियान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य में जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखी, जल मित्र और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से इसे जनआंदोलन का रूप दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसान के लिए पानी केवल संसाधन नहीं, बल्कि उसकी आजीविका और भविष्य से जुड़ा विषय है।
कोरिया का 5 प्रतिशत मॉडल बना उदाहरण
मुख्यमंत्री ने कोरिया जिले के ‘5 प्रतिशत मॉडल’ का विशेष उल्लेख किया। इस मॉडल के तहत किसान अपनी कृषि भूमि का करीब 5 प्रतिशत हिस्सा स्वेच्छा से वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के लिए उपलब्ध करा रहे हैं। इस भूमि पर ऐसी संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिनसे बारिश का पानी खेतों में ही रुककर धीरे-धीरे जमीन में समा सके। इस मॉडल में किसान केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि जल संरक्षण अभियान के सक्रिय भागीदार हैं।
तीसरे चरण में देश में पहला स्थान
जल संचय जन भागीदारी अभियान के पहले और दूसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया था। अब तीसरे चरण में राज्य पहले स्थान पर पहुंच गया है। इस चरण में प्रदेश में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से 77 हजार 719 का कार्य पूरा हो चुका है। अभियान का उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन और भू-जल स्तर में सुधार करना है।
5 जिले राष्ट्रीय स्तर पर चमके
जल संरक्षण के क्षेत्र में सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम जिले देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं। इन जिलों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी से वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के लिए प्रभावी कार्य किए गए हैं।
पानी की कमी वाले ब्लॉकों में आई कमी
राज्य में जल संरक्षण के प्रयासों का असर अब दिखाई देने लगा है। पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। वहीं पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के भी सामान्य श्रेणी में आने की संभावना जताई गई है। सरकार जल संरचनाओं के निर्माण, पुराने जल स्रोतों के संरक्षण और नियमित मॉनिटरिंग पर लगातार काम कर रही है।
जल संरक्षण से खेती को मिलेगा लाभ
राज्य सरकार का लक्ष्य बारिश के पानी को गांव और खेतों में ही रोककर भू-जल स्तर को बढ़ाना है। इससे सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बेहतर होगी, किसानों की मानसून पर निर्भरता कम होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपने सफल जल संरक्षण मॉडल को देश के अन्य राज्यों के साथ भी साझा करने के लिए तैयार है।


