CGPSC Scam: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की वर्ष 2003 की भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मामला एक बार फिर चर्चा में है। डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी समेत 147 अधिकारियों के चयन को लेकर उठे सवालों के बीच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) अब मामले में जल्द ही अदालत में चालान पेश करने की तैयारी कर रहा है।
15 से ज्यादा अधिकारी जांच के दायरे में
जानकारी के अनुसार, इस मामले में 15 से अधिक प्रशासनिक अधिकारी जांच के घेरे में हैं। आरोप है कि मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और स्केलिंग प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी कर कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिससे उनकी मेरिट प्रभावित हुई और महत्वपूर्ण पदों पर चयन हुआ।![]()
एक पेज के जवाब पर 55 अंक
दस्तावेजों के अनुसार, एक अभ्यर्थी को कथित तौर पर केवल एक पेज का उत्तर लिखने के बावजूद 60 में से 55 अंक दिए गए। वहीं, पूरी उत्तर पुस्तिका लिखने वाले कुछ अभ्यर्थियों को केवल 10 से 15 अंक मिले। इसी आधार पर मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे।
RTI के बाद खुला मामला
साल 2005 में अभ्यर्थी रविंद्र सिंह, वर्षा डोंगरे समेत अन्य उम्मीदवारों ने सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए परीक्षा से जुड़ी जानकारी हासिल की। इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। मामले की सुनवाई के दौरान चयन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा सामने आया।
हाईकोर्ट ने दिया था री-स्केलिंग का आदेश
वर्ष 2016 में बिलासपुर हाईकोर्ट ने मेंस परीक्षा के सभी वैकल्पिक विषयों की दोबारा स्केलिंग (री-स्केलिंग) और एंथ्रोपोलॉजी विषय की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का आदेश दिया था। साथ ही संशोधित मेरिट सूची जारी करने के निर्देश भी दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मामला
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ कई चयनित अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय ने री-स्केलिंग संबंधी आदेश पर रोक लगा रखी है और मामला विचाराधीन है। इस बीच EOW की जांच और संभावित चालान की तैयारी से 23 साल पुराना भर्ती विवाद फिर चर्चा में आ गया है।
