CG News: छत्तीसगढ़ की इस बच्ची का शरीर बन रहा पत्थर, एम्स में भर्ती

CG News: छत्तीसगढ़ की इस बच्ची का शरीर बन रहा पत्थर, एम्स में भर्ती

CG News: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की 14 वर्षीय जागेश्वरी एक दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित है। उसकी त्वचा पर कांटों जैसी मोटी परतें बन गई हैं, जिससे उसका शरीर पत्थर की तरह सख्त दिखाई देता है। बच्ची को बीती रात रायपुर स्थित एम्स में भर्ती कराया गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है।tcw

जागेश्वरी ‘इकथियोसिस हिस्ट्रिक्स’ नाम की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पहल के बाद उसे दोबारा एम्स में भर्ती कराया गया है। बाल आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए इलाज की व्यवस्था कराई है।

8 से 10 वर्षों से बीमारी से जूझ रही बच्ची

जानकारी के अनुसार दंतेवाड़ा और बीजापुर के बीच स्थित एक गांव में रहने वाली जागेश्वरी पिछले 8 से 10 वर्षों से इस गंभीर बीमारी से जूझ रही है। बीमारी के कारण उसकी त्वचा पेड़ की छाल जैसी मोटी और कठोर हो गई है। सोशल मीडिया में वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने बच्ची की मदद के नाम पर पैसा एकत्र किया था। आरोप है कि यह राशि बच्ची तक नहीं पहुंचाई गई। मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस ने जांच की और दो लोगों को हिरासत में लेकर उनसे 84 हजार रुपए बरामद किए।

जन्म के 3 माह बाद दिखने लगे लक्षण

परिजनों के अनुसार अप्रैल 2012 में जन्मी जागेश्वरी के शरीर में जन्म के लगभग तीन महीने बाद ही बीमारी के लक्षण दिखाई देने लगे थे। उसके पैरों की त्वचा पर छोटे-छोटे कांटों जैसे उभार बनने लगे थे। बीमारी की जानकारी नहीं होने के कारण परिवार ने शुरुआत में इसे किसी बुरी नजर या तंत्र-मंत्र का प्रभाव समझा और कई जगह झाड़-फूंक भी कराई। लेकिन समय के साथ बीमारी बढ़ती चली गई।

मां ने बताया कि दूसरे बच्चे उसकी त्वचा देखकर चिढ़ाते थे, जिससे वह धीरे-धीरे लोगों से मिलना-जुलना और घर से बाहर निकलना कम कर दी।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में इलाज

एम्स में बच्ची के इलाज की जिम्मेदारी त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. नम्रता छबड़ा और उनकी टीम को सौंपी गई है। डॉक्टरों ने उसकी प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञों के अनुसार पहले त्वचा की विस्तृत जांच कर बीमारी की प्रकृति और कारणों को समझा जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर अन्य विशेष जांचें भी कराई जाएंगी।

उपचार के शुरुआती चरण में त्वचा को नमी प्रदान करना, विशेष क्रीम और दवाओं का उपयोग, संक्रमण से बचाव तथा त्वचा की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

2019 में भी कराया गया था इलाज

अंबेडकर अस्पताल के त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय सिंह के अनुसार बच्ची को वर्ष 2019 में भी इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था। उस समय भी उसे इकथियोसिस नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित पाया गया था। उन्होंने बताया कि इस बीमारी में त्वचा अत्यधिक सूखी होकर मोटी परतों में बदल जाती है और कई स्थानों पर फटने लगती है। हालांकि यह बीमारी सामान्यतः जानलेवा नहीं होती।

क्या है इकथियोसिस हिस्ट्रिक्स

डॉक्टरों के अनुसार इकथियोसिस हिस्ट्रिक्स मुख्य रूप से आनुवंशिक कारणों से होने वाली दुर्लभ बीमारी है। कई मामलों में यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती है, जबकि कुछ मामलों में जीन में अचानक हुए बदलाव के कारण भी यह विकसित हो सकती है।

यह बीमारी सामान्यतः KRT1 और कुछ मामलों में GJB2 जीन में परिवर्तन से जुड़ी होती है। इस रोग में त्वचा मोटी, कठोर और कांटों जैसी दिखाई देने लगती है।

 

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