Ambikapur Admission Dispute: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में सरगुजिहा बोली बोलने पर बच्चे को एडमिशन नहीं देने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए स्वरंग किड्स एकेडमी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वहीं दूसरे स्कूल ने बच्चे को नि:शुल्क प्रवेश देकर मिसाल पेश की है। (सरगुजिहा बोलने पर बच्चे को नहीं मिला एडमिशन)
जानकारी के मुताबिक, चोपड़ापारा निवासी राजकुमार यादव अपने 4 वर्षीय बेटे सत्यम का एडमिशन कराने स्वरंग किड्स एकेडमी पहुंचे थे। डेमो क्लास के दौरान बच्चे ने सरगुजिहा बोली में जवाब दिया, जिसके बाद स्कूल प्रबंधन ने एडमिशन देने से इनकार कर दिया। परिजनों का आरोप है कि स्कूल ने यह कहते हुए प्रवेश नहीं दिया कि बड़े घरों के बच्चे इस भाषा को सीख जाएंगे। (अंबिकापुर स्कूल सरगुजिहा बोली विवाद)![]()
कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश (Sargujiha Boli Mamla Ambikapur)
एडमिशन नहीं मिलने पर परिजनों ने कलेक्टर अजीत वसंत से शिकायत की। कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।
DEO ने दी मान्यता रद्द करने की चेतावनी
जिला शिक्षा अधिकारी दिनेश झा ने स्कूल को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न संस्था की मान्यता निरस्त कर दी जाए। नोटिस में कहा गया है कि यह कृत्य नई शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों का उल्लंघन है। साथ ही स्कूल से मान्यता से जुड़े दस्तावेज भी तलब किए गए हैं।
दूसरे स्कूल ने दिया फ्री एडमिशन (Ambikapur school Sargujiha Boli Vivad)
मामला सामने आने के बाद बचपन प्ले स्कूल ने बच्चे को नि:शुल्क प्रवेश दिया है। स्कूल प्रबंधन ने कहा कि भाषा के आधार पर भेदभाव करना अनुचित है और बच्चे को बेहतर शिक्षा का अधिकार है।
NSUI ने जताया विरोध
पूर्व डिप्टी सीएम टी एस सिंहदेव ने कहा कि यदि किसी बच्चे को स्थानीय बोली के कारण एडमिशन नहीं दिया जाता है, तो ऐसे स्कूल को बंद कर देना चाहिए। वहीं NSUI ने भी स्कूल का पंजीयन रद्द करने की मांग की है।
स्कूल प्रबंधन ने आरोपों को बताया गलत
स्वरंग किड्स एकेडमी की प्रिंसिपल नेहा सिंह ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि एडमिशन की प्रक्रिया में डेमो क्लास के आधार पर बच्चे की अनुकूलता देखी जाती है, भाषा को लेकर कोई भेदभाव नहीं किया गया है।





