KTUJM Raipur: पत्रकारिता विश्वविद्यालय में कथित गलत नियुक्तियों पर हाईकोर्ट सख्त, 2 महीने में निर्णय के निर्देश

KTUJM Raipur: कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज हो गई है। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति द्वारा कुलपति पद के चयन के लिए तीन सदस्यीय खोज समिति का गठन किया गया है। इस समिति के अध्यक्ष पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति प्रो. डॉ. सच्चिदानंद शुक्ल को बनाया गया है।

KTUJM Raipur: कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में शिक्षकों की कथित नियमविरुद्ध नियुक्तियों को लेकर दायर याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए अहम आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता डॉ. शिवकृपा मिश्रा द्वारा प्रस्तुत सभी लंबित अभ्यावेदनों पर दो माह के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लिया जाए।

यह याचिका डॉ. शिवकृपा मिश्रा द्वारा दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने पत्रकारिता विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर पंकजनयन पाण्डेय और जनसंचार विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर राजेंद्र मोहंती की नियुक्तियों को नियमों के विपरीत बताते हुए चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया कि लंबे समय से शिकायतें लंबित होने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा था।

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हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि विश्वविद्यालय प्रशासन शिकायतों पर निर्णय लेने से बच नहीं सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमानुसार समयबद्ध निर्णय लेना विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है। इस आदेश को याचिकाकर्ता के लिए कानूनी और नैतिक राहत के रूप में देखा जा रहा है।

डॉ. शिवकृपा मिश्रा ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश पर गठित जांच समिति द्वारा पूर्व में ही अयोग्य शिक्षकों को हटाने और योग्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा की जा चुकी है। इसी क्रम में जनसंचार विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शहीद अली को बर्खास्त कर उनके स्थान पर डॉ. प्रमोद जेना की नियुक्ति की गई थी।

UGC मानकों के उल्लंघन का आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया है कि पंकजनयन पाण्डेय यूजीसी द्वारा निर्धारित न्यूनतम अर्हताओं को पूरा नहीं करते हैं। उनके पास न तो नेट/सेट है और न ही पीएचडी, इसके बावजूद उन्हें एसोसिएट प्रोफेसर पद पर नियुक्त किया गया। याचिकाकर्ता ने इसे देश में नियुक्ति का एक असाधारण और गंभीर मामला बताया है।

डॉ. मिश्रा ने यह भी आरोप लगाया कि उक्त अयोग्य नियुक्ति के कारण पत्रकारिता विभाग में स्वीकृत 40 सीटों के बावजूद वर्षों से केवल 4-5 विद्यार्थियों का ही प्रवेश हो पा रहा है, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसके अलावा यह भी कहा गया कि विश्वविद्यालय की कार्य परिषद द्वारा पंकजनयन पाण्डेय को बर्खास्त करने का आदेश पारित हो चुका है, इसके बावजूद उन्हें प्रतिमाह लाखों रुपये वेतन दिया जा रहा है।

दूसरी नियुक्ति पर भी उठे सवाल

याचिका में राजेंद्र मोहंती की नियुक्ति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कहा गया है कि वे मेरिट सूची में नहीं थे और साक्षात्कार में 20 में से 19.50 अंक पाने के बावजूद चौथे स्थान पर रहे। आरोप है कि उन्हें लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से मेरिटधारी अभ्यर्थियों को नियुक्ति से जुड़ी जानकारी नहीं दी गई।

 

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