Bastar Tourism : New Year पर बस्तर के 13 बेस्ट टूरिस्ट स्पॉट; झरने, पहाड़ और ट्रैकिंग के शानदार जगहें, आसानी से बीतेंगी छुट्टियां

बस्तर के 13 बेस्ट टूरिस्ट स्पॉट; झरने, पहाड़ और ट्रैकिंग के शानदार जगहें

Bastar Tourism : नए साल और सर्दियों की छुट्टियों में अगर आप भीड़भाड़ से दूर प्रकृति के बीच सुकून और रोमांच की तलाश में हैं, तो छत्तीसगढ़ का बस्तर आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है। हसीन वादियां, घने जंगल, पहाड़ों से गिरते खूबसूरत जलप्रपात, ट्रैकिंग और एडवेंचर से भरपूर बस्तर में परिवार और दोस्तों के साथ छुट्टियां बिताने के लिए शानदार जगहें हैं।

बस्तर संभाग में ऐसे कई पर्यटन स्थल हैं, जहां एक साथ प्राकृतिक सौंदर्य, रोमांच और धार्मिक आस्था का अनुभव किया जा सकता है। नए साल पर घूमने के लिए यहां के 13 प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

ये हैं बस्तर टूरिस्ट स्पॉट (Bastar tourist spot)

1. चित्रकोट (Chitrakote Waterfall) – बस्तर के संभागीय मुख्यालय जगदलपुर से महज 39 किमी की दूरी पर चित्रकोट जल प्रपात स्थित है। जानकार बताते हैं कि जल प्रपात का आकार घोड़े की नाल की तरह है। यहां इंद्रावती नदी का पानी लगभग 90 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरता है।

बारिश के दिनों में 7 से ज्यादा धाराएं नीचे गिरती हैं, तो वहीं अभी ठंड के समय में 2 से 3 धाराएं गिर रही हैं, जिसकी खूबसूरती देखने और प्रपात के नीचे बोटिंग करने की सुविधा है। चित्रकोट वाटर फॉल के नीचे एक छोटी सी गुफा में चट्टानों के बीच शिवलिंग स्थित है।

जल प्रपात से नीचे गिरने वाले पानी से सालभर शिवलिंग का जलाभिषेक होता है। कहा जाता है कि नाविक यहां भोलेनाथ की पूजा अर्चना करते हैं। हालांकि बारिश के दिनों में शिवलिंग तक पहुंचा नहीं जा सकता। लेकिन सर्दियों में पर्यटकों के कहने पर ही नाविक शिवलिंग तक लेकर जाते हैं।

चित्रकोट वॉटरफॉल तक पहुंचना पर्यटकों के लिए काफी आसान है। रायपुर से जगदलपुर और हैदराबाद से जगदलपुर तक हवाई सेवा भी शुरू हो चुकी है। इसके अलावा किरंदुल-विशाखापट्नम रेल मार्ग, सड़क मार्ग से भी पर्यटक पहुंच सकते हैं।

चित्रकोट तक सड़कों का जाल बिछा हुआ है। रायपुर, ओडिशा, आंध्रप्रदेश से लेकर देश के किसी भी कोने से पर्यटक पहुंच सकते हैं। इन तीनों सेवाओं का लाभ लेने वाले पर्यटकों को पहले जगदलपुर संभागीय मुख्यालय आना पड़ता है, फिर यहां से जल प्रपात तक जाना पड़ता है।

2. तीरथगढ़ (Tirathgarh Waterfall) – तीरथगढ़ जल प्रपात बस्तर के कांगेर घाटी नेशनल पार्क में स्थित है। इस जल प्रपात की खास बात है कि इसमें पानी सीढ़ी नुमा आकार में नीचे गिरता है। अभी ठंड के समय पानी का रंग सफेद मोतियों की तरह दिखता है, जो बेहद आकर्षण का केंद्र है। बस्तर की हसीन वादियों के बीच तीरथगढ़ प्रपात है।

संभागीय मुख्यालय जगदलपुर से करीब 40 से 45 किमी की दूरी पर यह प्रपात है। पर्यटक रायपुर और हैदराबाद से जगदलपुर तक हवाई और बस सेवा समेत सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं। फिर जगदलपुर से सड़क मार्ग से केशलूर होते हुए तीरथगढ़ जल प्रपात तक पहुंचा जा सकता है। तीरथगढ़ तक यात्री बसें भी चलती हैं। इसके अलावा पर्यटक कार या फिर दोपहिया वाहनों में भी जा सकते हैं।

3. धुड़मारास- बस्तर के धुड़मारास गांव ने कयाकिंग, बैंबू राफ्टिंग और होम स्टे ईको टूरिज्म से अंतरराष्ट्रीय पहचान बना ली है। UN के 60 देशों के बेस्ट गांव की लिस्ट में धुड़मारास देशभर में इकलौता है। UN टूरिज्म ने बेस्ट टूरिज्म विलेज के लिए 55 गांवों का चयन किया है। इसके अपग्रेडेशन (उन्नयन) लिस्ट में 20 गांव शामिल हैं।

बस्तर के संभागीय मुख्यालय जगदलपुर से करीब 40 किमी दूर कोटमसर पंचायत का धुड़मारास आश्रित गांव है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में तीरथगढ़-कोटमसर चौक से महज 2 से 3 किमी आगे सुकमा की तरफ जाना पड़ता है। फिर यहां एक चौक से लेफ्ट साइड धुड़मारास गांव के लिए रास्ता जाता है। कुछ दूर कच्चा रास्ता है, लेकिन इससे आगे पक्की सड़क है।

बीजापुर जिले का गोवा है मट्टी मरका

4. मट्टी मरका – यह स्पॉट बीजापुर जिले के भोपालपट्नम ब्लॉक में है। भोपालपट्नम से लगभग 20 किमी दूर मट्टी मरका गांव में इंद्रावती नदी किनारे दूर तक बिछी सुनहरी रेत और पत्थरों के बीच से कल-कल बहती इंद्रावती नदी का सौंदर्य देखते ही बनता है।

नदी छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा बनाते हुए बहती है। मट्टी मरका को बीजापुर जिले का गोवा भी कहा जाता है।
ट्रैकिंग करने वालों के लिए यहां का सफर रोमांच भरा

5. नीलम सरई जल प्रपात- बीजापुर जिले के उसूर ब्लॉक में स्थित नीलम सरई जलधारा हाल ही के कुछ साल पहले सुर्खियों में आई है। स्थानीय युवाओं की टीम ने इस नीलम सरई जल प्रपात को लोगों के सामने लाया। उसूर के सोढ़ी पारा से लगभग 7 किमी दूर तीन पहाड़ियों की चढ़ाई को पार कर यहां पहुंचा जा सकता है।

नीलम सरई जलप्रपात तक का सफर ट्रैकिंग के लिए ही माना जाता है। बस्तर की वादियों के बीच ट्रैकिंग करने वालों के लिए यहां का सफर रोमांच भरा होता है।

बस्तर की सबसे ऊंची जलधारा

6. नंबी वाटरफॉल- बीजापुर जिले के उसूर ग्राम से 8 किमी पूर्व की ओर नड़पल्ली ग्राम को पार करने के बाद नंबी ग्राम आता है। इस गांव से 3 किमी जंगल की ओर दक्षिण दिशा में पहाड़ पर बहुत ही ऊंचा जलप्रपात है। जिसे नीचे से देखने पर एक पतली जलधारा बहने के समान दिखाई देती है।

इसलिए इसे नंबी जलधारा कहते हैं। धरती की सतह से लगभग 300 फीट की उंचाई से गिरने वाले इस जलधारा को देखकर यह कहा जाता है कि यह बस्तर की सबसे ऊंची जलधारा है।

पत्थरों का गांव के नाम से प्रसिद्ध

7. पत्थरों का परिवार- नीलम सरई से मात्र तीन किमी की दूरी पर एक बेहद शानदार पर्यटन स्थल दोबे स्थित है। दोबे को पत्थरों का परिवार या फिर पत्थरों का गांव भी कहा जाता है। क्योंकि यहां चारों तरफ पत्थरों से बनी हुई अद्भुत कलाकृतियां देखी जा सकती है।

बड़े-बड़े पत्थरों से बनी हुई कलाकृतियां किसी किले के समान लगती है। चट्टानों की खोह रात गुजारने के लिए बेहद सुकून दायक जगह मानी जाती है। 2 साल पहले इस इलाके की खोज स्थानीय युवाओं ने की थी।

निरंतर बहने वाले जलप्रपात के लिए प्रसिद्ध

8. लंका पल्ली जल प्रपात- बीजापुर जिला मुख्यालय से 33 किमी दूर दक्षिण दिशा की ओर आवापल्ली गांव है। यहां से पश्चिम दिशा में लगभग 15 किमी पर लंकापल्ली गांव बसा हुआ है। जो यहां साल के 12 महीने निरंतर बहने वाले जलप्रपात के लिए प्रसिद्ध है।

प्रकृति की गोद में शांत एवं स्वच्छंद रूप से अविरल बहते इस जलप्रपात को लोग गोंडी बोली में बोक्ता बोलते हैं। नाइट कैंपिंग और ट्रैकिंग के लिए यह एक शानदार जगह है।

गोदावरी नदी पर इंचमपल्ली बांध परियोजना

9. इंचमपल्ली बांध – तारलागुड़ा क्षेत्र के चंदूर-दुधेड़ा गांव की सीमा से लगे गोदावरी नदी पर इंचमपल्ली बांध परियोजना अपने आप में ऐतिहासिक है। जिसका सर्वेक्षण एवं निर्माण कार्य 1983 में शुरू होना बताया जाता है।

गोदावरी नदी में छत्तीसगढ़ की सीमा से शुरू की गई इस बांध में लगभग 45 से 50 फीट ऊंची और 100 से 200 फीट लंबी, 10 से 12 फीट चौड़ी तीन दीवारें बनी हैं। तीनों दीवारों को जोड़ती लगभग 12 से 15 फीट ऊंची एक और दीवार भी बनी है। ये इलाका हिस्टोरिकल प्लेस की तरह नजर आता है।

इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस नहीं करते काम

10. झारालावा जल प्रताप – छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के झिरका के जंगल में खूबसूरत झारालावा जल प्रपात स्थित है। जानकार बताते हैं कि यह बस्तर का पहला ऐसा जल प्रपात है जिसके पास जाने से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस काम करना बंद कर देता है, जिसकी मुख्य वजह यहां स्थित चट्टानों की चुम्बकीय शक्ति है।

इस जल प्रपात तक पहुंचने के लिए कोई सुगम रास्ता भी नहीं है। कुछ दूर बाइक से फिर कई किमी तक पैदल चलना पड़ता है। बीच में एक-दो छोटे बरसाती नाले भी पड़ते हैं। इस प्रपात से सालभर पानी नीचे गिरता है।

गहरी खाई और खूबसूरत नजारा

11. मिचनार हिल टॉप – जगदलपुर से 40 तो वहीं चित्रकोट जल प्रपात से 25 किमी की दूरी पर मिचनार की खूबसूरत पहाड़ी स्थित है। हाल ही में इस जगह के बारे में लोगों को पता चला था। हालांकि यह भी एक तरह का ट्रैकिंग प्लेस है।

 

खड़ी पहाड़ में चढ़कर टॉप पर पहुंचा जाता है। जिसके बाद गहरी खाई और यहां का खूबसूरत नजारा देखने लायक होता है।

बाहुबली जल प्रपात के नाम से फेमस

12. हांदावाड़ा जल प्रपात- दंतेवाड़ा-नारायणपुर जिले की सीमा पर अबूझमाड़ में खूबसूरत हांदावाड़ा जल प्रपात स्थित है। साल 2004 के बाद हांदावाड़ा जलप्रपात के बारे में लोगों को जानकारी लगी थी। लेकिन यहां पहुंचने की राह आसान नहीं है। इंद्रावती नदी के पाहुरनार घाट में अब पुल निर्माण का काम हो चुका है।

इसलिए पर्यटकों की पहली चुनौती यहां खत्म हो गई है। हांदावाड़ा जल प्रपात तक पहुंचने पक्की सड़क भी नहीं है। बारिश के दिनों में यह जल प्रपात बेहद खूबसूरत है। यहां बाहुबली मूवी की शूटिंग की अफवाह उड़ी थी, इसलिए इसे बाहुबली जल प्रपात के नाम से भी जाना जाता है।
भगवान परशुराम और गणेश जी के युद्ध की किवदंती

13. ढोलकल शिखर- दंतेवाड़ा जिले के ढोलकल शिखर पर करीब ढाई से तीन हजार फीट की ऊंचाई पर गणपति विराजे हैं। गणपति जी से लोगों की आस्था जुड़ी है। साथ ही कई किवंदतियां भी हैं। बताया जाता है कि भगवान परशुराम और गणेश जी का यहां युद्ध हुआ था। इसके बाद यहां एक दंत वाले गणेश जी की मूर्ति स्थापित की गई थी।

हालांकि, इसकी पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है। गांव के बुजुर्गों और कहानी के अनुसार यह जानकारी सामने आई थी। वर्तमान में यहां हर साल ढोलकल महोत्सव का भी आयोजन किया जाता है। लोगों का मानना है कि गणेश जी क्षेत्र की रक्षा करते हैं।

हर जिला मुख्यालय में रुकने की व्यवस्था

जगदलपुर में 50 से ज्यादा होटल हैं। जिसमें 500 से लेकर 3500 रुपए तक एक दिन का किराया है। 2-3 रिसॉर्ट हैं। जगदलपुर तक हवाई और रेल कनेक्टिविटी भी है। सड़क मार्ग के माध्यम से ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश महाराष्ट्र जैसे राज्यों से बड़ी आसानी से पहुंच सकते हैं।

वहीं जगदलपुर से दंतेवाड़ा और बीजापुर की भी सीधी सड़कें हैं। इन दोनों जिलों में कुल 15 से 20 होटल हैं। यहां भी 800 से लेकर 2500 रुपए तक होटल आसानी से मिल जाएगा। दंतेवाड़ा तक विशाखापट्टनम और ओडिशा से रेल कनेक्टिविटी भी है।

 

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