CG Land Registry Hike: जमीन रजिस्ट्री हुई महंगी, सरकारी कीमत 10 से 100% तक बढ़ी, मकान खरीदना-बेचना हो गया महंगा

CG Land Registry Hike: राज्य सरकार ने करीब आठ महीने की देरी के बाद नई कलेक्टर गाइडलाइन 20 नवंबर से लागू कर दी है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई, अंबिकापुर समेत कई जिलों में जमीन की सरकारी कीमत 10% से 100% तक बढ़ा दी गई है। इससे जमीन व संपत्तियों की रजिस्ट्री महंगी हो गई है।

 

पंजीयन विभाग के अफसरों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में आखिरी बार 2017-18 में कीमत बढ़ाई गई थी। 2018-19 से कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। लंबे समय से जमीन की सरकारी कीमत नहीं बढ़ने की वजह से बाजार भाव और सरकारी कीमत में बड़ा अंतर हो गया था। इसके अलावा सड़क पर और सड़क से 20 मीटर अंदर की जमीन के भाव भी बेहद असंतुलित हो गए थे।

कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में जमीन की सरकारी कीमत 30% तक कम कर दी थी। इसके बाद पांच साल तक जमीन की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया था। भाजपा की नई सरकार ने सबसे पहले 30% की छूट खत्म की। करीब डेढ़ साल बाद जमीन की कीमत भी बढ़ा दी गई है।

 

इसका असर सीधे आम लोगों पर होगा। लोगों के लिए प्लॉट, फ्लैट, मकान और दुकान खरीदना महंगा हो जाएगा। जमीन की कीमत बढ़ने की वजह से सरकारी और प्राइवेट बिल्डरों के मकान भी महंगे हो जाएंगे। इससे लोगों का बैंक लोन भी बढ़ेगा।

पहली बार बायपास सड़क की कीमत भी मुख्य सड़क के बराबर

 

राज्य में ऐसा पहली बार हुआ है, जब जमीन की सरकारी कीमत तय करने के लिए वार्डों के अंदर से जाने वाली बायपास सड़कों को भी मुख्य सड़क माना गया है। अफसरों का कहना है कि अभी तक सड़क के एक ओर कीमत ज्यादा रहती थी और दूसरी ओर कम।

लेकिन अभी नई गाइडलाइन ऐसे तय की गई है कि सभी जगहों पर कीमत एक समान होगी। मुख्य सड़क पर स्थित संपत्तियों की कीमत सबसे ज्यादा होती है। इसलिए पंजीयन विभाग ने इस पर सख्ती की है। इसमें मुख्य बात यह है कि नई गाइडलाइन निगम चुनाव के लिए अभी वार्डों का जो परिसीमन हुआ है, उसी के आधार पर ही किया गया है।

 

यानी जो एरिया जिस वार्ड में शामिल किए गए हैं नई गाइडलाइन में भी कीमत उसी के अनुसार ही ही बढ़ाई गई है। अब किसी भी वार्ड में जमीन की कीमत एक समान नहीं रहेगी।

 

मध्यप्रदेश और तेलंगाना मॉडल लागू 

 

पंजीयन विभाग की टीम ने मध्यप्रदेश और तेलंगाना के रजिस्ट्री मॉडल का लगातार अध्ययन किया। मध्यप्रदेश में भी बाजार और सरकारी भाव में अंतर आने की वजह से 150% तक रेट बढ़ाए गए हैं। तेलंगाना के हर जिले में कलेक्टर गाइडलाइन औसतन 50% तक बढ़ाई गई है। वहां की सरकारों का भी तर्क था कि कीमत में आई असमानता को दूर करने के लिए यह जरूरी था।

 

सेजबहार, सड्डू समेत आउटर के जमीन की कीमत कई गुना बढ़ी

 

सस्ते मकान भी महंगे होंगे: कलेक्टर गाइडलाइन बढ़ने के साथ ही आउटर में जमीन की कीमत भी बढ़ गई है। सेजबहार, सड्डू, कचना, संतोषीनगर, पचपेड़ीनाका, रिंग रोड, मठपुरैना, भाठागांव, कुम्हारपारा, शीतलापारा, ट्रांसपोर्ट नगर, सरोना, बीरगांव, चंदनीडीह, तरुण नगर, बोरियाकला, बोरियाखुर्द समेत कई इलाकों में भी जमीन-मकान खरीदना महंगा हो गया है। इन सभी जगहों पर कीमत 20% तक बढ़ गई है। कलेक्टर गाइडलाइन कम होने की वजह से अभी इन जगहों पर 15 से 20 लाख रुपए में जमीन-मकान मिल जाते हैं। अब इनकी कीमत एक से तीन लाख रुपए तक बढ़ गई है।

 

शहर में इन जगहों पर जमीन की कीमत बढ़ी: रायपुर में आउटर के साथ ही शहर में जयस्तंभ से कोतवाली चौक, टाटीबंध से रिंग रोड, महोबाबाजार, कोटा, स्टेशन रोड, गुढि़यारी, सदरबाजार, बैजनाथपारा, देवेंद्रनगर, डीडी नगर, शंकरनगर, मौदहापारा, कचना, अवंति विहार, रामसागरपारा, एमजी रोड, फाफाडीह, खम्हारडीह, खमतराई, सेजबहार, डूंडा, मुजगहन, बोरियाकला, माना, टेमरी समेत कई इलाकों में कलेक्टर गाइडलाइन 10 से 20% तक बढ़ गई है।

 

रजिस्ट्री का खर्च बढ़ा: किसी भी जमीन की रजिस्ट्री पर स्टांप ड्यूटी 5.5% अदा करनी पड़ती है। महिलाओं को इसमें आधा फीसदी की छूट है। रजिस्ट्री के दौरान एक प्रतिशत पंचायत उपकर और एक प्रतिशत निगम ड्यूटी भी अदा करनी होती है। उदाहरण के तौर पर किसी व्यक्ति ने 20 लाख की जमीन खरीदी है तो उसे ई-स्टांप, रजिस्ट्री शुल्क और उपकर पर करीब 2 लाख खर्च करने पड़ रहे हैं।

 

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