CG News: रायपुर जिला प्रशासन ने धान खरीदी प्रक्रिया में बाधा डालने वाली सहकारी समितियों पर बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह ने रविवार की छुट्टी के दिन भी कड़ा फैसला लेते हुए जिले की 250 राशन दुकानों का आवंटन सहकारी समितियों से वापस लेकर ग्राम पंचायतों को सौंप दिया है। अब पंचायतें अपने स्तर पर इन दुकानों का संचालन करेंगी।
कलेक्टर को लगातार शिकायत मिल रही थी कि सहकारी समितियां धान खरीदी में अनावश्यक व्यवधान, किसानों को मंडी में प्रवेश से रोकना, तथा खरीद प्रक्रिया धीमी करने जैसे काम कर रही थीं। किसानों को तरह–तरह की बातें बताकर वापस भी भेजा जा रहा था। शिकायतों के आधार पर प्रशासन ने तुरंत फैसला लेते हुए समितियों से दुकानें वापस ले ली।

12 कंप्यूटर ऑपरेटरों पर FIR
राज्य में हड़ताल पर गए सहकारी समितियों के कर्मचारियों पर सरकार ने एस्मा लागू कर दिया है. सभी कर्मचारियों को हड़ताल खत्म कर धान खरीदी के लिए मंडियों में लौटने के निर्देश दिए गए हैं. ड्यूटी में कर्मचारियों को वापस नहीं लौटने पर सरकार ने एक्शन लेना शुरू किया. रायपुर के पुरानी बस्ती, खरोरा, धरसींवा और तिल्दा-नेवरा थानों में दर्जनभर कर्मचारियों पर छत्तीसगढ़ अति आवश्यक सेवा संधारण व विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 के तहत केस दर्ज किया गया है.
जानकारी के मुताबिक पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र में राजू दास, ओमप्रकाश माहले, विजय गुप्ता, सुवेश, आनंद सहित अन्य पर केस दर्ज किया गया है. धरसींवा में बृज मोहन देवांगन, तिल्दा में रामकुमार वर्मा और पोषण लाल धुरंधर, जबकि खरोरा में कौशल वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है. सभी कर्मचारी मंडियों में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं.

हड़ताली समिति प्रबंधकों को लगा बड़ा झटका
कलेक्टर के इस फैसले के बाद हड़ताल करने वाले सहकारी समिति प्रबंधकों को बड़ा झटका लगा है. समिति प्रबंधकों ने भी आरोप लगाया है कि हड़ताल तोड़ने के लिए ये फैसला लिया गया है. इस फैसले के बाद भी अभी तक हड़ताल खत्म करने की कोई सूचना जारी नहीं की गई है. ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से दुकानों का संचालन सहकारी समितियां ही कर रही थी.
