Diwali 2025: छत्तीसगढ़ में दिवाली के अवसर पर गौरी-गौरा पूजन का विशेष महत्व है। इस साल दीवाली सोमवार को पड़ रही है और उसी रात आधी रात से गौरी-गौरा प्रतिमा स्थापना का शुभ कार्य शुरू होगा। पूजा का यह सिलसिला अगले दिन तक चलता है, जिसके बाद श्रद्धालु परंपरागत तरीके से प्रतिमाओं का विसर्जन करेंगे।
पूरे राज्य में श्रद्धालु गाड़ा-बाजा की धुन पर जसगीत गाते हुए तालाब तक जाते हैं और हर्षोल्लास के साथ गौरा-गौरी की प्रतिमाओं का विसर्जन करते हैं।

लक्ष्मी पूजा के साथ गौरा-गौरी की परंपरा (Diwali Gaura Gauri Puja)
जहां देशभर में दीपावली पर माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, वहीं छत्तीसगढ़ में इसके साथ गौरा-गौरी पूजा का भी विशेष आयोजन होता है। राजधानी रायपुर सहित कई इलाकों के गौरा-गौरी चौक में भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित की जाती है और पारंपरिक विधि से पूजन किया जाता है। (Diwali Govardhan Puja)

तालाब की मिट्टी से बनती हैं गौरा-गौरी की प्रतिमाएं (Dipawali Gaura Gauri Puja Mahatva)
गांव में तैयारियां जोरों पर हैं। परंपरा के अनुसार, गांव के बुजुर्ग तालाब से मिट्टी लाकर प्रतिमा बनाते हैं। कुछ जगहों पर बाजार से खरीदी गई प्रतिमाएं भी स्थापित की जाती हैं।


शिव-पार्वती विवाह की रस्में निभाई जाती हैं
गौरी-गौरा पूजा में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की रस्में निभाई जाती हैं। पूरी रात भजन-कीर्तन, गीत और नृत्य का आयोजन होता है। अगले दिन गोवर्धन पूजा के बाद श्रद्धालु गाजे-बाजे और जसगीत के साथ प्रतिमाओं को नदी-तालाब में विसर्जित करते हैं।
