Kinnar Poison Case: 24 किन्नरों ने एक साथ पीया ज़हर, सामने आया वीडियो, जानिए क्यों?

Kinnar Poison Case

Kinnar Poison Case: मध्य प्रदेश की राजधानी इंदौर में बुधवार शाम एक दर्दनाक घटना सामने आई। शहर के नंदलालपुरा इलाके में किन्नर समुदाय के दो गुटों के बीच वर्चस्व की जंग इस कदर बढ़ गई कि एक गुट के 24 सदस्यों ने सामूहिक रूप से ज़हर पी लिया। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर पुलिस और एम्बुलेंस की टीम पहुंची और सभी को एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि सभी की हालत अब खतरे से बाहर है, हालांकि दो किन्नर आईसीयू में निगरानी में हैं।

क्या है पूरा मामला

घटना पंढरीनाथ थाना क्षेत्र के नंदलालपुरा स्थित एक किन्नर डेरे की है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि लंबे समय से दो गुटों के बीच वर्चस्व को लेकर विवाद चल रहा था। बुधवार को विवाद इतना बढ़ गया कि एक गुट के 24 सदस्यों ने गुस्से में आकर फिनायल जैसा जहरीला पदार्थ पी लिया।

एडिशनल डीसीपी (क्राइम ब्रांच) राजेश दंडोतिया ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में यह मामला आत्महत्या का नहीं लग रहा, लेकिन पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जा रही है।

वायरल हुआ वीडियो

घटनास्थल से सामने आए वीडियो में किन्नर समुदाय के सदस्य एक-दूसरे को संभालते और एम्बुलेंस बुलाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि मौके पर हड़कंप मच गया था।

समाज के हाशिए पर खड़ा समुदाय

इंदौर का किन्नर समुदाय शहर की सामाजिक-सांस्कृतिक परंपरा का अहम हिस्सा है। जन्म, विवाह और शुभ अवसरों पर आशीर्वाद देना इनकी परंपरा रही है। लेकिन आपसी गुटबाजी, क्षेत्रीय वर्चस्व और सामाजिक भेदभाव के कारण ये बार-बार विवादों में घिरते रहे हैं।

2022 में इंदौर में एक किन्नर की हत्या का मामला सामने आया था, जबकि जुलाई 2025 में विजयनगर इलाके में एक संदिग्ध मौत भी इसी समुदाय की आपसी रंजिश से जुड़ी बताई गई थी।

सामाजिक कार्यकर्ता नेहा शर्मा का कहना है कि “किन्नर समुदाय की समस्याएं केवल सामाजिक स्वीकृति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आर्थिक असुरक्षा और मानसिक तनाव भी एक बड़ी चुनौती है। सरकार की योजनाओं का लाभ इन्हें जमीनी स्तर पर पहुंचाना आवश्यक है।”

जांच जारी

पुलिस ने दोनों गुटों से पूछताछ शुरू कर दी है। पंढरीनाथ थाने के एसएचओ ने बताया कि वरिष्ठ किन्नरों को बुलाकर सुलह की कोशिश की जा रही है। जिला प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन को सभी प्रभावितों को निःशुल्क इलाज और काउंसलिंग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा, “यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है। किन्नर समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।”

संवाद ही समाधान

सभी 24 किन्नर अब खतरे से बाहर हैं और जल्द ही अस्पताल से छुट्टी मिलने की संभावना है। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारे समाज में हर पहचान को समान सम्मान और स्वीकार्यता मिली है या नहीं।

 

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