रायपुर/बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एनएच-45 पर बारीडीह गांव के पास 14 मवेशियों के कुचले जाने की घटना ने प्रदेशभर में सनसनी फैला दी थी। अब इस मामले पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और प्रशासन से तीखे सवाल पूछे हैं।
बुधवार को चीफ जस्टिस की विशेष डिवीजन बेंच ने इस घटना पर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई की और पूछा “मवेशियों को सड़कों पर खुला छोड़ने वाले मालिकों के खिलाफ कोई FIR दर्ज हुई है या नहीं? सरकार ऐसी घटनाओं पर कैसे रोक लगाएगी?”
इस पर महाधिवक्ता ने जवाब के लिए समय मांगा, और कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 30 जुलाई 2025 तय की है।
पहले भी लग चुका है कोर्ट का फटकार
इस मुद्दे पर पहले भी कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
एडवोकेट पलाश तिवारी व संजय रजक द्वारा एडवोकेट सुनील ओट्वानी के माध्यम से दाखिल जनहित याचिका में कहा गया था कि “राज्य में सड़कों पर खुलेआम मवेशी घूमते हैं, जिससे रोज़ दुर्घटनाएं होती हैं। सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है।”
ड्राइवर और गाय मालिक दोनों पर केस
बिलासपुर एनएच-45 पर ग्राम बारीडीह के पास सोमवार रात एक तेज रफ्तार अज्ञात हाइवा वाहन ने सड़क पर बैठी गायों को कुचल दिया। हादसे में 13 गायों की मौके पर मौत, जबकि 4 घायल हैं जिनका इलाज जारी है।
घटना सोमवार देर रात बारीडीह के नजदीक स्थित नंदलाल पेट्रोल पंप के निकट घटित हुई है। इस मामले में थाना रतनपुर में अज्ञात वाहन चालक और मवेशी मालिक पर एफ.आई.आर दर्ज किया गया हैं।
भविष्य में इस प्रकार की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए संबंधित ग्रामों के सरपंचों के साथ मिलकर एक कमेटी तैयार कर मवेशियों के गले में रेडियम नेक बेंड लगाया जा रहा हैं। मवेशियों को लावारिस छोड़ने वाले पशु मालिकों के विरुद्ध 291 बीएनएस के तहत एफ.आई.आर दर्ज करने का प्रावधान है। ऐसी स्थिति में अब लापरवाह मवेशी मालिकों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज किया जाएगा।
