कभी सोचा है… जंगलों, खेतों और गाँवों के बीच छुपा वो इतिहास, जो किताबों में नहीं, मिट्टी के नीचे और टूटे खंडहरों में सांस लेता है? शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि छत्तीसगढ़ सिर्फ खनिज, जंगल या आदिवासी संस्कृति के लिए नहीं, बल्कि सदियों पुरानी ईंट कला और गुमनाम मंदिरों के लिए भी मशहूर है।

मध्य भारत के इस हिस्से ने वैदिक काल से लेकर 17वीं शताब्दी तक राजवंशों को पनपते, मिटते और फिर से उभरते देखा है। इसी छत्तीसगढ़ में कहीं मिट्टी के टीले दफन शहरों का राज खोलते हैं, कहीं पत्थर की मूर्तियां इतिहास के पन्नों को फिर से जीवित कर देती हैं।

रायपुर जिले के नवगांव गाँव में एक ऐसा ही कम प्रसिद्ध ईंटों का प्राचीन शिव मंदिर मौजूद है। तालाब किनारे बने इस मंदिर को करीब 12वीं शताब्दी में बनाया गया था। कहते हैं, इसे बनाने वाले कारीगरों ने शर्त रखी थी कि मंदिर सिर्फ रात में ही बनेगा। जैसे ही सूरज की पहली किरण फूटने वाली थी, उन्होंने निर्माण अधूरा छोड़ दिया इसलिए मंदिर का गर्भगृह आज भी खाली दिखता है।

माना जाता है कि इस मंदिर का अग्रभाग शायद कभी सजाया ही नहीं गया या फिर वक्त ने इसकी सजावट को निगल लिया। इसका मंडप, अंतराल और गर्भगृह सब ईंटों से बने हैं। दिलचस्प बात ये है कि इसके कुछ खंभे और चौखट दीवारों से भी ज्यादा पुराने लगते हैं। इसका मतलब साफ है ये मंदिर दो अलग कालखंडों में खड़ा किया गया होगा।
और हैरानी की बात ये है कि इस मंदिर के बगल में ही एक और पुराना मंदिर है जहाँ बारह ज्योतिर्लिंग एक ही स्थान पर विराजमान हैं। सोचिए! एक गाँव, दो रहस्य और दोनों आज भी अपने किस्से खुद में छुपाए बैठे हैं।
तो अगली बार छत्तीसगढ़ की सैर पर जाओ तो सिर्फ जंगल या झरने नहीं इन भूले-बिसरे खंडहरों में छुपा इतिहास भी जरूर तलाशना।
