रायपुर | Raipur Health System: राजधानी रायपुर के सबसे बड़े अस्पताल भीमराव अंबेडकर में हालत अब इतने बदतर हो चुके हैं कि तेज दुर्गंध से पूरा परिसर दूभर हो गया है, ठीहा छत्तीसगढ़ की टीम जब वहां पहुंची तो देखा की वाकय में दुर्गंध इतनी तेज थी कि वहां खड़ा होना भी मुश्किल था। यहां तक के कैमरे पर रिपोर्टिंग करने भी हमारे लिए चुनौती साबित हुई. हमें मजबूरन स्कार्फ लगाकर शूट करना पड़ा क्योंकि वहां पर सांस लेना भी बहुत मुश्किल हो रहा था .

देखिए मर्चुरी के भीतर समय तीन लावारिस शव है जो पड़े -पड़े सड़ रहे हैं. एक नवजात बच्चा एक 95 साल की बुजुर्ग महिला और एक 65 साल का पुरुष। देखिए औपचारिक रूप से जांच पूरी हो चुकी है उसके बावजूद भी इनको दफन करने के लिए दो गज जमीन तक नसीब नहीं है. यही कारण है की 3 शव इसी स्थान पर मंचुरी में रखा गया है.

हालत अब इतने बदतर हो चुके हैं मर्चुरी के सभी 8 फ्रीजर खराब पड़े हैं जिसके कारण शवों को स्ट्रेचर पर ही रखा गया है नतीजन तेज बदबू से पूरा परिसर भर चुका है. इसे लेकर लोगों को आने-जाने में भी काफी परेशानी हो रही है, क्योंकि बदबू बहुत ही गंदी है.

बता दें कि रोजाना 15 शवों को यहां पर पोस्टमार्टम के लिए लाया जाता है. देखिए अगर किसी के परिवार वाले हैं तो पोस्टमार्टम के बाद वे अपने साथ शव ले जाते हैं. लेकिन जो अज्ञात रहते हैं उनको अस्पताल में ही रखा जाता है. लेकिन क्या हो जब मर्चुरी में ही 8 फ्रीजर खराब हो तो ऐसे में लावारिस शवों को कहा जाए , पोस्टमार्टम करने के बाद सभी मृतकों के शवों को उसे स्थान पर रख दिया जाता है। जिसके कारण तेज दुर्गंध उठ रही है और पूरे अस्पताल में धीरे-धीरे फैल रही है.

हमने जब जमीनी हकीकत जाने की कोशिश की तो यह पाया कि वाकई में रायपुर के जोरा में एक जमीन है जहां पर एक संस्था लावारिस लोगों को ले जाकर वहां पर अंतिम संस्कार करती है. लेकिन अब परेशानी यह भी सामने आ रही है कि उनके पास अब जगह ही नहीं बचे इससे पहले लगभग चार से 5000 तक के लावारिस शवों का अब तक अंतिम संस्कार संस्था द्वारा किया जा चुका है। और अब स्थिति यह है की जगह काफी ज्यादा फुल हो चुके हैं.

जिसके कारण वे शवों का अंतिम संस्कार नहीं कर पा रहे हैं. वहां पर बिल्कुल भी जगह नहीं बची है ऐसा नहीं है कि संस्था वालों ने किसी से इस पूरे मामले पर बातचीत नहीं की है उन्होंने पहले भी जिला प्रशासन को कई बार अवगत कराया है। और अपनी नई जमीन की मांग भी की है. बावजूद इसके अभी तक ना तो प्रशासन जागा है किसी प्रकार से कोई उनके लिए सुविधा उपलब्ध कराई है जो कि लोगों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है.

बता दें कि सिस्टम के लापरवाही से अब स्वास्थ्य कर्मियों पर भी खतरा मंडरा रहा है। क्योंकि धीरे-धीरे बदबू फैल रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ता ही जा रहा है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं. अस्पताल प्रबंधन का यह कहना है कि फ्रीजर की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया है और प्रक्रिया जारी है. लेकिन सवाल यह उठता है कि तब तक इन शवों का क्या होगा ?

हम जब ग्राउंड रिपोर्ट पर पहुंचे और स्थिति को समझने का प्रयास किया तो हमने वाकई में यह पाया कि यूं तो करोड़ों की जमीनों का भूमि पूजन किया जाता है. मंदिर बनाने के लिए अन्य कार्यों के लिए लेकिन जब बात लावारिस शवों की आए तो तो फिर हम इसमें पीछे क्यों हट रहे हैं।

आखिरकार कब तक की स्थिति रहेगी यह देखने वाली बात है फिलहाल संस्था का यह कहना है कि अभी वर्तमान में जो 3 शव हैं अस्पताल में उनको वे अपने साथ ले जाएंगे और जगह मैनेज करके उन शवों का आज अंतिम संस्कार किया जाएगा। लेकिन सवाल यही पर खत्म नहीं होता बल्कि यह उठता है कि मान लीजिए आने वाले दिनों में अगर कोई और लावारिस शव फिर से ऐसे आता है तब फिर संस्था क्या करेगी ? क्या वह भी इसी तरीके से अस्पताल परिसर में रहकर सड़ जाएगी या फिर तब तक शायद प्रशासन जाग जाए.
