Jaggi Murder Case: अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, सरेंडर पर रोक

Jaggi Murder Case

Jaggi Murder Case: एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जोगी) के नेता अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट (Amit Jogi Supreme Court) से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के सरेंडर आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है और मामले में सीबीआई से जवाब मांगा है।tcw

दरअसल, हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल को अपने फैसले में अमित जोगी को दोषी करार देते हुए उन्हें 3 सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। (अमित जोगी उम्रकैद सजा)

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सीबीआई से पूरे मामले में जवाब तलब किया है। साथ ही, जब तक सीबीआई अपना जवाब पेश नहीं करती, तब तक हाईकोर्ट के सरेंडर आदेश पर रोक लगा दी गई है। (Amit Jogi Supreme Court)

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2007 में निचली अदालत ने किया बरी

एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की साल 2003 में हुई हत्या के मामले में निचली अदालत ने 2007 में 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन सबूतों का अभाव बताते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था. इस फैसले को पीड़ित के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी.

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया था. हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को दोषी माना और दोषी करार देते हुए 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया था.

2004 में CBI ने शुरू की जांच

सतीश जग्गी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी पर जग्गी हत्याकांड का आरोप लगाया था. केस की जांच साल 2004 में CBI को सौंपी गई थी. सीबीआई ने जांच के बाद करीब 11 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 31 लोगों को आरोपी बनाया गया. मई 2007 में स्पेशल कोर्ट ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. दो लोग सरकारी गवाह बन गए, जबकि सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था.

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद अमित जोगी को बड़ी राहत मिली है और मामले की अगली सुनवाई CBI के जवाब के बाद होगी।

Jaggi Murder Case: अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, 23 अप्रैल को होगी सुनवाई

 

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