Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 का पांचवां दिन आज मनाया जा रहा है। पंचमी तिथि को मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा का विधान है। मान्यता है कि स्कंदमाता की उपासना करने से भक्त को सुख-समृद्धि, शांति और दिव्य ज्ञान की प्राप्ति होती है।
स्कंदमाता का महत्व (Skandamata Mahatv)
मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता होने के कारण इस नाम से विख्यात हैं। शास्त्रों के अनुसार, उनकी आराधना से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख-शांति का वास होता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त (Navratri 2026 5th Day Shubh Muhurt)
- ब्रह्म मुहूर्त- 05:06 AM से 05:53 AM तक
- प्रातः सन्ध्या मुहूर्त- 05:29 AM से 06:40 AM तक
- अभिजित मुहूर्त- 12:21 PM से 01:09 PM तक
- गोधूलि मुहूर्त- 06:49 PM से 07:13 PM तक
- सायाह्न सन्ध्या- 06:50 PM से 08:01 PM तक
- इन शुभ मुहूर्तों के साथ ही सुबह 06:40 AM से 07:52 AM तक का समय भी पूजन के लिए शुभ रहेगा।

मां स्कंदमाता का स्वरूप और विशेषताएं
शास्त्रों में देवी स्कंदमाता को सिंह पर सवार, चार भुजाओं वाली देवी के रूप में वर्णित किया गया है. उनके दो हाथों में कमल पुष्प सुशोभित रहते हैं. एक हाथ से वे भक्तों को वरद मुद्रा में आशीर्वाद देती हैं और उनके विग्रह में बालरूप भगवान कार्तिकेय गोद में विराजमान रहते हैं. देवी कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं. कमल पर विराजमान होने के कारण उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।
स्कंदमाता की पूजन विधि (Skandamata Pujan Vidhi)
पंचमी के दिन भक्तों को माता के श्रृंगार में सुंदर और शुभ रंगों का प्रयोग करना चाहिए. पूजा के समय साधक को विनम्रता और पूर्ण श्रद्धा के साथ देवी स्कंदमाता और बाल कार्तिकेय की आराधना करनी चाहिए. मां को कुमकुम, अक्षत, पुष्प, चंदन और फल अर्पित करें. साथ ही घी का दीपक जलाकर स्तुति करें. इस दिन विशेष रूप से मां को केले का भोग लगाने का महत्व है. माना जाता है कि केले का प्रसाद ब्राह्मण को दान करने से बुद्धि का विकास होता है और साधक जीवन में प्रगति की ओर अग्रसर होता है. साथ ही परिवार में सुख, शांति और वैभव बढ़ता है।
