Raipur News: रायपुर में पुलिस भर्ती अभ्यर्थियों के समर्थन में किए गए प्रदर्शन के बाद भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष सहित 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। कोतवाली थाना पुलिस ने ओसीएम चौक पर मुख्य सड़क जाम करने और यातायात बाधित करने के आरोप में यह कार्रवाई की है।
जानकारी के अनुसार, 4 नवंबर को भीम आर्मी के बैनर तले 100 से 150 कार्यकर्ता पुलिस भर्ती अभ्यर्थियों की मांगों के समर्थन में मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च कर रहे थे। ओसीएम चौक पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारी मुख्य सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
एंबुलेंस और स्कूल बसें भी जाम में फंसीं
प्रदर्शन के कारण कई एंबुलेंस और स्कूली बच्चों की बसें भी लंबे समय तक जाम में फंसी रहीं। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से प्रदर्शनकारियों से सड़क खाली करने और नवा रायपुर के तूता स्थित निर्धारित धरना स्थल पर जाने की अपील की, लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं माने।
11 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR
पुलिस की समझाइश के बावजूद सड़क खाली नहीं करने पर कोतवाली थाना पुलिस ने भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश आजाद, जिला अध्यक्ष देवेंद्र मैरिसा, युवराज ढीढी समेत 11 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
क्या है पुलिस भर्ती विवाद?
प्रदेश में 5,967 आरक्षक पदों पर भर्ती प्रक्रिया 2023-24 में शुरू हुई थी। चयन सूची जारी होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने मेरिट सूची, नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया और फिजिकल टेस्ट में अनियमितता के आरोप लगाए। उनका कहना है कि अधिक अंक पाने वाले कई अभ्यर्थियों का चयन नहीं हुआ, जबकि कम अंक वालों को नियुक्ति मिली।
खाली पदों पर दूसरी सूची की मांग
अभ्यर्थियों का दावा है कि कुल 5,967 पदों में से करीब 4,367 पदों पर नियुक्ति हुई है, जबकि लगभग 1,600 पद अब भी रिक्त हैं। उनका कहना है कि कई अभ्यर्थियों के एक से अधिक जिलों में चयन होने और अन्य कारणों से ये पद खाली रह गए हैं। इसलिए दूसरी चयन सूची जारी कर शेष पदों पर नियुक्ति की मांग की जा रही है।
मामला हाईकोर्ट में भी लंबित
भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर मामला बिलासपुर हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। याचिकाओं में फिजिकल टेस्ट की प्रक्रिया और मूल्यांकन पर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही स्वतंत्र एजेंसी या CBI से जांच कराने की मांग भी की गई है। फिलहाल मामले की सुनवाई न्यायालय में जारी है।



