रायपुर/नई दिल्ली। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अगले पांच वर्षों में छत्तीसगढ़ के ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 5.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं सामने रखी हैं। राज्य ने 2030 तक अपनी हरित ऊर्जा क्षमता 3 हजार मेगावाट से बढ़ाकर 15 हजार मेगावाट करने का लक्ष्य तय किया है।
जनसंपर्क विभाग (DPR) की 2 नवंबर को जारी विज्ञप्ति के अनुसार मुख्यमंत्री नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 (India Renewable Energy Summit & Expo) में शामिल हुए और सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के स्टॉल का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार उन्होंने वहां छत्तीसगढ़ पवेलियन का शुभारंभ भी किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 से 5 नवंबर तक चलने वाले इस चार दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ किया। सम्मेलन में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
नवीकरणीय और ताप विद्युत में बड़े निवेश की योजना
DPR के अनुसार राज्य में 23,923 मेगावाट की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में करीब 1.33 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना है। वहीं ताप विद्युत क्षमता के विस्तार में लगभग 3.27 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना बताई गई है।
प्रदेश में 10 पंप स्टोरेज परियोजनाएं भी चिन्हित की गई हैं, जिनकी कुल क्षमता 12,300 मेगावाट है। इन परियोजनाओं में लगभग 65 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसके अलावा अगले दो वर्षों में 10 हजार मेगावाट-घंटे बैटरी भंडारण क्षमता विकसित करने की योजना है।
खैरा बना पहला पूर्ण सौर-संचालित गांव
विज्ञप्ति में राज्य की सौर ऊर्जा उपलब्धियों का भी जिक्र किया गया। राजनांदगांव जिले का खैरा गांव प्रदेश का पहला पूर्ण सौर-संचालित गांव बना है। गांव के सभी 141 घरों की छतों पर 2-2 किलोवाट के सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिनसे कुल 282 किलोवाट बिजली उत्पादन हो रहा है।
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत प्रदेश में करीब 1.26 लाख संयंत्र लगाए गए हैं। वहीं किसानों के लिए 1.66 लाख सौर सिंचाई पंप स्थापित किए गए हैं।
संभावना और लक्ष्य, अभी वास्तविक निवेश नहीं
गौरतलब है कि 5.60 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं और योजनाओं से जुड़ा है। यह अब तक प्राप्त हुआ वास्तविक निवेश नहीं है। मुख्यमंत्री ने देश-विदेश के निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया।
