Sirpur Laxman Temple: छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि सामने आई है। महासमुंद जिले में महानदी के तट पर स्थित प्राचीन नगरी सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है। इससे सिरपुर के विश्व धरोहर स्थल बनने की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।
प्राचीन मंदिरों, बौद्ध विहारों, दुर्लभ मूर्तिकला, स्थापत्य कला और धार्मिक सहिष्णुता की परंपरा के लिए प्रसिद्ध सिरपुर अब वैश्विक पहचान की ओर बढ़ रहा है। यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल होना छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
राज्य सरकार ने जताई खुशी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार प्रयास कर रही है। पर्यटन और संस्कृति विभाग की ओर से प्रदेश के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने पर जोर दिया जा रहा है।
सिरपुर के यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल होने से यहां पर्यटन गतिविधियों के विस्तार और ऐतिहासिक महत्व को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
दक्षिण कोसल की राजधानी रहा सिरपुर
सिरपुर का इतिहास भारतीय सभ्यता, संस्कृति और धार्मिक समन्वय की अनूठी मिसाल है। प्राचीन समय में श्रीपुर के नाम से प्रसिद्ध यह नगर पांडुवंशी शासकों के शासनकाल में दक्षिण कोसल की राजधानी रहा था।
महानदी के किनारे बसा सिरपुर कभी राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। यहां शैव, वैष्णव, बौद्ध और जैन परंपराओं का एक साथ विकास हुआ।
सातवीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी सिरपुर की यात्रा की थी। उनके यात्रा विवरणों में यहां बौद्ध धर्म की समृद्ध परंपरा और बड़ी संख्या में विहारों का उल्लेख मिलता है।
लक्ष्मण मंदिर है स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण
सिरपुर का प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला की उत्कृष्ट मिसाल है। सातवीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर ईंटों से बने भारत के सबसे सुंदर प्राचीन मंदिरों में शामिल है।
मंदिर की नक्काशी, कलात्मक सजावट और निर्माण शैली तत्कालीन शिल्पकारों की कुशलता को दर्शाती है। मंदिर में भगवान विष्णु से जुड़े कई पौराणिक प्रसंगों का सुंदर चित्रण किया गया है।
ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार इस मंदिर का निर्माण रानी वासटा ने अपने पति हर्षगुप्त की स्मृति में कराया था। इसका निर्माणकाल लगभग 650 ईस्वी माना जाता है।
गंधेश्वर महादेव मंदिर में आस्था और इतिहास का संगम
महानदी के तट पर स्थित गंधेश्वर महादेव मंदिर सिरपुर की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। मंदिर परिसर में कई प्राचीन मूर्तियां और पुरातात्विक अवशेष सुरक्षित हैं।
यहां मौजूद कलाकृतियां उस समय की कला, संस्कृति और धार्मिक जीवन की जानकारी देती हैं। मंदिर में प्राचीन मंदिरों और बौद्ध विहारों से मिले स्थापत्य अवशेषों का भी उपयोग किया गया है।
बौद्ध विहारों के लिए भी प्रसिद्ध है सिरपुर
सिरपुर प्राचीन भारत में महायान बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां हुए उत्खनन में कई बौद्ध विहारों के अवशेष मिले हैं, जो उस समय की शिक्षा और आध्यात्मिक परंपरा को दर्शाते हैं।
आनंदप्रभु कुटी विहार और स्वास्तिक विहार यहां के प्रमुख बौद्ध स्थल हैं। इन विहारों में भिक्षुओं के रहने, अध्ययन और ध्यान की व्यवस्था थी।
आनंदप्रभु कुटी विहार में भगवान बुद्ध की भूमिस्पर्श मुद्रा वाली प्रतिमा भी मिली है। वहीं स्वास्तिक विहार अपनी विशेष बनावट और स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध है।
यूनेस्को सूची में शामिल होना छत्तीसगढ़ के लिए गौरव
सिरपुर का यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल होना छत्तीसगढ़ की प्राचीन संस्कृति और विरासत को दुनिया के सामने लाने की दिशा में बड़ा कदम है। अब भविष्य में सिरपुर को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
सिरपुर की ऐतिहासिक धरोहर, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विविधता इसे देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करने की क्षमता रखती है।


