छत्तीसगढ़ संवाद में बड़ा एक्शन: सव्यसाची हटाए गए, 3 जिलों के PRO को नोटिस

रायपुर। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग की संस्था ‘संवाद’ में वर्षों से चल रहे करोड़ों रुपये के प्रिंटिंग और होर्डिंग से जुड़े घोटाले पर राज्य सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू की है। शिकायतों का सिलसिला मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तक पहुंचा तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह और जनसंपर्क सचिव रोहित यादव भी लंबे समय से व्यवस्था में सुधार को लेकर सक्रिय रहे। इसके बाद जनसंपर्क आयुक्त एवं संवाद के सीईओ रजत बंसल ने कार्रवाई की कमान संभाली और लंबे समय से जमे तंत्र पर एक के बाद एक फैसले लिए। कार्रवाई की पहली बड़ी कड़ी संवाद में करीब 25 वर्षों से प्रिंटिंग विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे सव्यसाची कर को पद से हटाने के रूप में सामने आई।

इसी पृष्ठभूमि में अब छत्तीसगढ़ संवाद में लंबित मामलों पर कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, संवाद के प्रकाशन विभाग में सरकारी पुस्तकों की छपाई और टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। आरोप हैं कि कुछ मामलों में कार्यादेश के अनुरूप पुस्तकों का आकार, छपाई की गुणवत्ता और निर्धारित प्रतियों की संख्या में अंतर किया गया। इन आरोपों के मद्देनजर प्रिंटिंग से जुड़े टेंडरों की प्रक्रिया भी जांच और समीक्षा के दायरे में है। बताया जा रहा है कि संवाद के नए CEO ने संबंधित टेंडर को निरस्त करने का फैसला लिया है। इस कार्रवाई को प्रकाशन संबंधी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

इधर, सीपीआर रजत बंसल के निर्देश पर संवाद के कामकाज में तकनीकी स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं। NIC से जुड़े दो डेवलपर्स को हटाया गया है, जबकि विभागीय प्रचार-प्रसार से संबंधित कामकाज में लापरवाही के मामले में तीन जिलों के PRO को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

प्रशासनिक स्तर पर आईएएस रजत बंसल की छवि हमेशा से ही सक्रिय और काम करने वाले अधिकारी की रही है। रायपुर नगर निगम से लेकर बस्तर तक उनके कार्यकाल में कई ऐसी पहल देखने को मिलीं, जिनका सीधा संबंध जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं में सुधार से रहा।

जनसंपर्क विभाग और संवाद में लंबित मामलों की समीक्षा के बाद हो रही इन कार्रवाइयों से विभागीय कामकाज में जवाबदेही तय करने पर जोर दिखाई दे रहा है। सव्यसाची कर को पद से हटाए जाने और अन्य प्रशासनिक कदमों के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि समीक्षा के दौरान सामने आने वाले अन्य मामलों में क्या कार्रवाई की जाती है।

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