Raipur News: गणपति विसर्जन के दौरान शहर में डीजे और धुमाल की गूंज सुनाई दे रही है। लोग तेज धुनों पर नाचते-गाते भगवान गणेश को विदाई दे रहे हैं, लेकिन इसी शोर के बीच पारंपरिक ब्रास बैंड कलाकारों का कारोबार संकट में पहुंच गया है।
रायपुर में इस बार गणपति उत्सव के दौरान ब्रास बैंड संचालकों को एक भी बुकिंग नहीं मिली। बैंड कलाकारों का कहना है कि कुछ साल पहले तक जहां शहर में 15 से 18 ब्रास बैंड पार्टियां थीं, वहीं अब यह संख्या घटकर सिर्फ 5-6 रह गई है।
डीजे और धुमाल से कम हुई मांग
ब्रास बैंड संचालकों के अनुसार, डीजे और धुमाल के बढ़ते चलन के कारण पारंपरिक बैंड की मांग लगातार कम हो रही है। काम नहीं मिलने के कारण कई कलाकार दूसरे रोजगार की ओर बढ़ रहे हैं। कुछ कलाकार सब्जी बेचने और ऑटो चलाने जैसे काम करने को मजबूर हैं।
पहले त्योहार और शादियों में मिलते थे ऑर्डर
रायपुर ब्रास बैंड कल्याण समिति के अध्यक्ष मोहम्मद फहीम ने बताया कि पहले गणेश उत्सव, शादी और अन्य कार्यक्रमों में बैंड वालों के पास लगातार काम रहता था। अब स्थिति बदल गई है और कई पुराने बैंड बंद हो चुके हैं।
उन्होंने बताया कि शहर में कभी 15 से 18 बैंड पार्टियां संचालित होती थीं, लेकिन अब सिर्फ कुछ ही लोग इस कारोबार में टिके हुए हैं। इस साल गणेश उत्सव में भी कोई ऑर्डर नहीं मिलने से कलाकारों की परेशानी बढ़ गई है।
कई पुराने बैंड हो चुके हैं बंद
बैंड संचालकों के मुताबिक, रायपुर में कई पुराने और प्रसिद्ध बैंड अब बंद हो चुके हैं। कलाकारों को रखने, उनके रहने-खाने और मेहनताना देने का खर्च बढ़ गया है, जबकि कार्यक्रमों से मिलने वाली आय लगातार कम हो रही है। संचालकों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में कई और ब्रास बैंड बंद हो सकते हैं।
धुमाल की बढ़ी मांग
एवरग्रीन बैंड के संचालक साबिर मोहम्मद ने बताया कि ब्रास बैंड का करीब 90 प्रतिशत काम प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि कलाकार कई दिनों तक अभ्यास करते हैं और कार्यक्रम के लिए तैयारी करते हैं, लेकिन अब लोग पारंपरिक संगीत की जगह तेज आवाज वाले धुमाल को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। ब्रास बैंड कलाकारों का कहना है कि पारंपरिक संगीत को बचाने के लिए लोगों को फिर से बैंड संस्कृति को बढ़ावा देना होगा।




