CG News: अतिथि व्याख्याता नीति पर विवाद; कैबिनेट मंजूरी बिना जारी हुई नीति, वित्त विभाग ने लौटाया प्रस्ताव

CG News: प्रदेश के शासकीय कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति के लिए 17 जुलाई को जारी संशोधित नीति विवादों में आ गई है। कैबिनेट की मंजूरी के बिना नीति जारी किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। वित्तीय और सेवा शर्तों से जुड़े प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए वित्त विभाग ने प्रस्ताव उच्च शिक्षा विभाग को वापस भेज दिया है।

मानदेय और अवकाश में किए गए बदलाव

नई नीति के अनुसार अतिथि व्याख्याताओं को प्रति कार्य दिवस 2000 रुपए के हिसाब से मानदेय दिया जाएगा। हालांकि एक महीने में अधिकतम 50 हजार रुपए तक का भुगतान किया जाएगा। पहले उन्हें प्रति पीरियड के आधार पर लगभग 400 से 500 रुपए मानदेय मिलता था।

नीति में अतिथि ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारी के लिए प्रतिदिन 1600 रुपए, अतिथि शिक्षण सहायक के लिए 1400 रुपए तथा अतिथि ग्रंथालय सहायक और क्रीड़ा सहायक के लिए 1200 रुपए प्रतिदिन मानदेय का प्रावधान किया गया है। इनके लिए मासिक अधिकतम सीमा क्रमशः 40 हजार, 35 हजार और 30 हजार रुपए निर्धारित की गई है। साथ ही प्रत्येक शिक्षण सत्र में 11 आकस्मिक अवकाश देने का भी प्रावधान रखा गया है।

वित्त विभाग ने जताई आपत्ति

मानदेय और अवकाश जैसे वित्तीय एवं सेवा शर्तों से जुड़े प्रावधानों के लिए वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग की मंजूरी आवश्यक मानी जाती है। आरोप है कि नीति जारी होने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने वित्त विभाग को प्रस्ताव भेजा, जिस पर वित्त विभाग ने आपत्ति दर्ज करते हुए उसे वापस लौटा दिया।

भर्ती प्रक्रिया जारी रहेगी

उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि वर्ष 2024 की नीति में संशोधन किया गया है। वित्त विभाग की ओर से कुछ आपत्तियां आई हैं, जिन पर चर्चा की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अतिथि व्याख्याताओं की भर्ती प्रक्रिया जारी रहेगी।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भी कहा कि नोटिफिकेशन जारी करने की प्रक्रिया में यदि कोई प्रक्रियात्मक त्रुटि हुई है तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि इसका असर अतिथि व्याख्याताओं की भर्ती पर नहीं पड़ेगा और नियुक्ति प्रक्रिया जारी रहेगी।

 

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