Vikram I Rocket: श्रीहरिकोटा: भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस का पहला निजी रॉकेट ‘विक्रम-I’ लॉन्च के लिए तैयार है। आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) में रॉकेट के दूसरे चरण का सफल इंटीग्रेशन पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल की उड़ान को लेकर उत्साह बढ़ गया है।![]()
स्वदेशी तकनीक से तैयार हुआ विक्रम-I
विक्रम-I को पूरी तरह स्वदेशी तकनीक के आधार पर विकसित किया गया है। यह चार चरणों वाला आधुनिक रॉकेट है, जिसमें दूसरे चरण ‘कलाम-250’ का एकीकरण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। शेष चरणों की तैयारियां भी अंतिम दौर में हैं।
रॉकेट की संरचना उन्नत कार्बन कम्पोजिट सामग्री से तैयार की गई है, जो पारंपरिक धातुओं की तुलना में अधिक मजबूत और हल्की मानी जाती है। उड़ान के दौरान अत्यधिक तापमान से सुरक्षा के लिए विशेष थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम लगाया गया है।
अत्याधुनिक गाइडेंस और कंट्रोल सिस्टम
विक्रम-I में एडवांस गाइडेंस, नेविगेशन और कंट्रोल सिस्टम लगाए गए हैं, जो उड़ान के दौरान रॉकेट की दिशा और स्थिरता बनाए रखने में मदद करेंगे। रॉकेट में रोबोटिक नियंत्रण प्रणाली भी शामिल है, जो लगातार नोजल की दिशा नियंत्रित कर मिशन की सटीकता सुनिश्चित करती है।
रॉकेट की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि उड़ान के दौरान उपयोग समाप्त होने वाले हिस्से स्वतः अलग हो जाते हैं, जिससे ईंधन दक्षता बढ़ती है और पेलोड क्षमता बेहतर होती है।
350 किलोग्राम तक के सैटेलाइट ले जाने में सक्षम
करीब 24 मीटर ऊंचा विक्रम-I रॉकेट पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में लगभग 350 किलोग्राम तक के छोटे उपग्रहों को स्थापित करने की क्षमता रखता है। यह क्षमता छोटे और मध्यम आकार के उपग्रह मिशनों के लिए इसे एक महत्वपूर्ण लॉन्च प्लेटफॉर्म बनाती है।


