Raipur Skywalk: राजधानी रायपुर के बहुप्रतीक्षित जीई रोड स्काईवॉक प्रोजेक्ट की रफ्तार एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर के सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल इस स्काईवॉक का निर्माण निर्धारित समय सीमा के अनुसार मार्च 2026 तक पूरा किया जाना था, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए लक्ष्य समय पर पूरा होता नहीं दिख रहा है। निर्माण कार्य की धीमी गति के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्थाओं में लापरवाही भी चिंता का विषय बन गई है।![]()
Raipur Skywalk: रायपुर स्काईवॉक का काम 10 महीने बाद भी अधूरा, लोगों को चढ़नी पड़ेंगी 100 सीढ़ियां
हाल ही में तेज आंधी के दौरान स्काईवॉक के ऊपरी हिस्से में लगी पॉली कार्बोनेट शीट नीचे गिर गई थी, जिससे जीई रोड पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। मानसून की दस्तक से पहले भी निर्माण स्थल पर लोहे के एंगल, सीढ़ियां, प्लास्टिक ड्रम और अन्य सामग्री खुले में पड़ी हुई है, जिससे हादसे की आशंका बनी हुई है।
दैनिक भास्कर की टीम ने शनिवार दोपहर स्काईवॉक का निरीक्षण किया। इस दौरान ऊपर जाने का एक रास्ता खुला मिला, जबकि शास्त्री चौक की ओर जाने वाला गेट बंद था। निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य बंद मिला और कुछ कर्मचारी आराम करते नजर आए। कर्मचारियों ने काम बंद होने का कारण लंच टाइम बताया। वहीं, कई स्थानों पर निर्माण सामग्री बिखरी हुई मिली और सुरक्षा घेराबंदी भी अधूरी दिखाई दी।
भाजपा सरकार बनने के बाद लंबे समय से रुके इस प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने के लिए 21 मई 2025 को वर्कऑर्डर जारी किया गया था। निर्माण एजेंसी को 10 माह के भीतर मार्च 2026 तक काम पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था। हालांकि आठ माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी करीब 60 प्रतिशत कार्य शेष है।
करीब 1470 मीटर लंबे स्काईवॉक प्रोजेक्ट में 63 गर्डर और 25 स्लैब लगाए जाने हैं। इसके अलावा शास्त्री चौक पर प्रस्तावित रोटेटरी का निर्माण भी अब तक शुरू नहीं हो पाया है। जानकारी के अनुसार इसका निर्माण भिलाई स्थित यार्ड में किया जा रहा है।
प्रोजेक्ट के तहत 12 स्थानों पर लिफ्ट और एस्केलेटर लगाए जाने हैं। साथ ही एसीपी शीट, एल्युमिनियम फ्रेम, डिवाइडर रेलिंग, सीसीटीवी नेटवर्क, कंट्रोल रूम और एंट्री-एग्जिट प्वाइंट जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य अभी अधूरे हैं। वर्तमान में अधिकांश हिस्सों में केवल बेसिक स्ट्रक्चर का काम ही पूरा हो पाया है।
इस मामले में ब्रिज विभाग के चीफ इंजीनियर एस.के. कोरी का कहना है कि शहर के बीच पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण गर्डर और रोटेटरी का निर्माण भिलाई यार्ड में कराया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही इसका लाभ आम लोगों को मिलेगा।



