Mohdeshwar Nath Mandir: मोहदेश्वर नाथ मंदिर छत्तीसगढ़ की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यह मंदिर रायपुर से लगभग 45 किलोमीटर दूर तरपोंगी के अंदर मोहदा गांव में रानीसागर तालाब के पास स्थित है। होलिका दहन के अवसर पर यहां रातभर भव्य मेला लगता है, जिसमें प्रदेशभर से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। होलिका दहन से अगले दिन तक मंदिर के पट 24 घंटे खुले रहते हैं। (तरपोंगी मोहदा गांव मोहदेश्वर नाथ मंदिर)

साल में तीन बार रंग बदलता है शिवलिंग
मंदिर में स्थापित शिवलिंग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह साल में तीन बार अपना रंग बदलता है। मंदिर के पुजारी पं. रामकृष्ण शुक्ल के अनुसार, शिवलिंग हर चार माह में अपना स्वरूप बदलता है। फरवरी से मई तक शिवलिंग भूरा रंग का दिखाई देता है, जून से सितंबर तक इसका रंग काला हो जाता है, जबकि अक्टूबर से जनवरी के बीच यह भूरा-काला मिश्रित और खुरदुरा आकार में नजर आता है। (साल में 3 बार शिवलिंग का रंग बदलता है)
मंदिर में प्रत्येक पूर्णिमा के दिन प्रात: काल दुग्ध, जल, चंदन सहित विभिन्न सामग्री से अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से अभिषेक करने पर सभी कार्य सिद्ध होते हैं।

होलिका दहन पर लगता है ऐतिहासिक मेला
हर वर्ष होलिका दहन के दिन यहां रातभर मेला आयोजित होता है। ग्रामीणों और पुजारी के अनुसार, यह परंपरा लगभग 800 साल पुरानी है। इस वर्ष 3 मार्च को होलिका दहन के अवसर पर मेला आयोजित किया जाएगा। शाम 7 बजे ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर के पट खोले जाएंगे और भस्म आरती व गंगा आरती के साथ भगवान शिव की विशेष पूजा की जाएगी। (Tarpongi Mohda Mohdeshwar Shivling)
ऋषि की तपस्या से प्रकट हुए थे शिवलिंग
मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में एक ऋषि यहां तपस्या करने आए थे। उनकी कठोर साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और आशीर्वाद स्वरूप भूमि से शिवलिंग प्रकट हुआ। इसे कलयुग से भी पूर्व का बताया जाता है।

तीन साल तक जल अर्पित करने की मान्यता
मंदिर के पुजारी और ग्रामीणों के अनुसार, होलिका दहन के दिन लगातार तीन साल तक भगवान शिव को जल अर्पित करने से मनोकामना पूर्ण होती है। साथ ही भक्तों को मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित मोहदेश्वरी माहामाया के दर्शन भी करने होते हैं।
मान्यता है कि शिवलिंग पर जल अर्पित करने के बाद श्रद्धालु गांव से बिना कुछ खाए-पिए सीधे अपने घर लौटते हैं। मनोकामना पूरी होने पर भक्त कथा-पूजा कराने मंदिर पहुंचते हैं। कहा जाता है कि पेट रोग से पीड़ित लोग और नि:संतान महिलाएं तीन वर्ष तक जल अर्पित करें तो उनकी मनोकामना पूरी होती है।
