Pola Tihar 2025: प्रदेशभर में आज मनाया जा रहा पोला तिहार, गांव से लेकर शहर तक दिख रहा उल्लास

Pola Tihar 2025

Pola Tihar 2025: छत्तीसगढ़ में आज परंपरागत पोला तिहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। गांव से लेकर शहर तक इस त्योहार का उत्साह स्पष्ट नजर आ रहा है। कृषि प्रधान इस राज्य में पोला तिहार का विशेष महत्व है, क्योंकि इस दिन बैलों की पूजा-अर्चना की जाती है।

पोला तिहार में बैलों की जाती है पूजा (Bail Puja Pora Tihar)

किसान अपने कृषि कार्यों से विरत होकर बैलों को नहलाकर, सजाकर उनकी पूजा करते हैं। इसके साथ ही घर-घर में मिट्टी, लकड़ी या पीतल के बने बैलों की पूजा की जाती है, जिन्हें बच्चे खेलते भी हैं। इस मौके पर घरों में ठेठरी-खुरमी और अईरसा जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं।

पोला तिहार 2025

अमावस्या को मनाया जाता है पोरा तिहार (Pora Tihar 2025)

भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अमावस्या को वृषभ पूजन दिवस यानी पोला-पोरा तिहार मनाया जाता है। पंडितों के अनुसार, अमावस्या तिथि 22 अगस्त को दोपहर 11.37 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 23 अगस्त सुबह 11.02 बजे तक रहेगी। उदय तिथि के अनुसार वृषभ पूजन 23 अगस्त को मनाया जाएगा।

Pora Tihar 2025

इसे कुशोत्पाटिनी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन ब्राह्मण विशेष पूजा के तहत कुश उखाड़ते हैं, जिसे आगे देवकार्य और पितृकार्य में प्रयोग किया जाता है।

 Bail Puja Pora Tihar

इस बार अमावस्या शनिवार को पड़ने के कारण इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है। शास्त्रों में बताया गया है कि शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या पर विशेष रूप से शनि देव की पूजा की जाती है। जिन लोगों को शनि दोष है, वे शनि देव को सरसों तेल, काला तिल आदि अर्पित करते हैं। वहीं, पितृ दोष निवारण के लिए काले तिल को दूध में मिलाकर पीपल वृक्ष में पितरों के निमित्त चढ़ाने की परंपरा है।

 

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