Nang Panchami 2025: नंगा पंचमी या नाग पंचमी एक पारंपरिक हिन्दू पर्व है जो श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से सर्पों की पूजा के लिए समर्पित होता है। भारत के कई हिस्सों में इसे “नगा पंचमी” के नाम से भी पुकारा जाता है, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों या छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में।
नंगा पंचमी क्यों मनाया जाता है? (why is naag panchami celebrated)
1. सर्पों को देवता मानकर पूजा
हिन्दू धर्म में नागों को देवता का स्थान प्राप्त है। शेषनाग, वासुकी, तक्षक, कालिया जैसे सर्पों का वर्णन अनेक पुराणों में मिलता है। यह पर्व नागों के प्रति श्रद्धा और आभार प्रकट करने का प्रतीक है, जिससे वे प्रसन्न हों और जीवन में भय न आए।

2. कृषि संस्कृति से जुड़ाव
सावन के महीने में जब कृषि कार्य चल रहा होता है, तब खेतों में साँपों का निकलना आम बात होती है। लोग मानते हैं कि अगर इस दिन सर्पों की पूजा की जाए तो वे खेतों और घरों में नुकसान नहीं पहुँचाते।
3. पर्यावरण संरक्षण और सह-अस्तित्व का संदेश
सर्प भी पर्यावरण की जैविक श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह पर्व सिखाता है कि हर जीव का अपना महत्व है और हमें उनसे डरने की जगह उनका सम्मान करना चाहिए।
4. पौराणिक कथाओं से जुड़ी मान्यताएं (beliefs related to mythology)
एक कथा के अनुसार जनमेजय नामक राजा ने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए सर्प यज्ञ किया था जिससे सारे सर्प जलकर भस्म हो रहे थे। तब आस्तिक मुनि ने आकर यज्ञ को रोका और सर्पों की रक्षा की। उसी दिन को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है एक अन्य मान्यता है कि भगवान शिव के गले में सर्प विराजमान हैं, इसलिए इस दिन सर्पों की पूजा शिवजी की कृपा पाने का भी माध्यम है।
नंगा पंचमी पर क्या किया जाता है? (What is done on Nanga Panchami?)
दीवार या जमीन पर गोबर या गेरू से नाग देवता की आकृति बनाकर पूजा की जाती है। दूध, दूब, फूल, हल्दी, चावल, लड्डू आदि चढ़ाए जाते हैं। महिलाएं व्रत रखती हैं और नाग देवता से परिवार की रक्षा, संतान की दीर्घायु की कामना करती हैं। कई स्थानों पर असली साँपों की भी पूजा की जाती है, विशेषकर नागाओं के मठों और मंदिरों में।
छत्तीसगढ़ में नंगा पंचमी
छत्तीसगढ़ में इसे “नंगा पंचमी” के नाम से जाना जाता है। ग्रामीण इलाकों में इस दिन खास पूजा-अर्चना होती है और मान्यता है कि इस दिन कोई खेत में हल या फावड़ा नहीं चलाता, ताकि सर्प को हानि न हो।
