CG NEWS: 1 जुलाई से छत्तीसगढ़ में महंगी होंगी ज़मीनें; 8 साल बाद बदलेगी गाइडलाइन दर, किसानों को होगा फायदा

CG RAIPUR NEWS: अगर आप छत्तीसगढ़ में जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो 1 जुलाई 2025 से पहले रजिस्ट्री कराना अच्छा रहेगा। राज्य सरकार आगामी 1 जुलाई से नई गाइडलाइन दरें लागू करने जा रही है, जिससे जमीन की कीमतों में 10% से 25% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

 

पंजीयन विभाग के सूत्रों के अनुसार, नई गाइडलाइन दरों पर काम अंतिम चरण में है। प्रदेश के 33 जिलों में जमीन की मौजूदा बाजार दरों का सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है और अब क्षेत्रवार मूल्य निर्धारण का विश्लेषण किया जा रहा है। रायपुर और उसके आसपास के 50 किलोमीटर के दायरे में जमीन सबसे अधिक महंगी हो सकती है, क्योंकि इन क्षेत्रों में रियल एस्टेट गतिविधियां तेज हैं।

 

8 साल बाद हो रहा संशोधन

 

राज्य में जमीन की गाइडलाइन दरों में पिछली बार 2017 में संशोधन हुआ था। इसके बाद से कई क्षेत्रों में जमीन की बाजार दरें कई गुना बढ़ चुकी हैं, लेकिन रजिस्ट्री अभी भी पुरानी दरों पर हो रही थी। अब 8 साल बाद दरों में बदलाव से यह अंतर काफी हद तक कम हो जाएगा।

 

किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

 

विशेषज्ञों का मानना है कि नई दरों से सबसे ज्यादा फायदा किसानों को होगा। अक्सर सड़क किनारे या अन्य उपयोगी क्षेत्रों में किसानों की ज़मीन का अधिग्रहण सरकार द्वारा किया जाता है, लेकिन उन्हें मुआवजा गाइडलाइन दर के अनुसार मिलता है, जो वास्तविक कीमत से बहुत कम होता है। अब गाइडलाइन दरें बाजार मूल्य के करीब होने से अधिग्रहण मुआवजा भी अधिक मिलेगा, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से मजबूती मिलेगी।

 

कालेधन पर लगेगी लगाम

 

अभी तक ज़मीन के सौदों में कई बड़े बिल्डर और डेवेलपर गाइडलाइन दर से कम पर रजिस्ट्री कराकर बाकी रकम नकद में लेते थे। इससे न सिर्फ सरकार को राजस्व नुकसान होता था, बल्कि कालेधन का लेन-देन भी बढ़ता था। लेकिन जब गाइडलाइन दरें बाजार मूल्य के करीब आ जाएंगी, तो यह अंतर घटेगा और कालेधन पर अंकुश लगेगा।

 

राजस्व में होगा इजाफा

 

पिछले वित्तीय वर्ष में छत्तीसगढ़ को पंजीयन से 2,900 करोड़ रुपये का राजस्व मिला, जो अन्य राज्यों की तुलना में बेहद कम है। उदाहरण के लिए:

 

महाराष्ट्र: ₹40,000 करोड़

कर्नाटक: ₹30,000 करोड़

मध्यप्रदेश (केवल इंदौर): ₹3,000 करोड़

 

नई दरें लागू होने से छत्तीसगढ़ में भी पंजीयन से बढ़ा हुआ राजस्व प्राप्त होगा। यदि औसतन 20% की वृद्धि होती है, तो सरकारी खजाने में हजारों करोड़ की अतिरिक्त आमदनी हो सकती है।

 

 

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