Jhiram Ghati Attack: झीरम घाटी नरसंहार मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाते हुए इसे दुर्लभतम अपराध माना है। अदालत ने आदेश दिया कि दोषियों को गर्दन में फंदा लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए। फैसला सुनाने की प्रक्रिया करीब 15 मिनट में पूरी हुई। अब सजा की पुष्टि के लिए मामला बिलासपुर हाईकोर्ट भेजा गया है। दोषियों को 30 दिन के भीतर अपील करने का अधिकार भी दिया गया है।
13 साल पुराने इस मामले में अदालत ने नक्सली हमले में शामिल 10 आरोपियों को दोषी ठहराया, लेकिन जांच एजेंसी की चार्जशीट के अनुसार हमले की साजिश रचने वाले शीर्ष माओवादी नेता अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं। कई अन्य वांछित आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट और रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी हैं।
Jhiram Ghati Attack: झीरम घाटी हमले के 10 दोषियों को फांसी की सजा, मारे गए थे 29 दिग्गज
कोर्ट में ऐसे सुनाया गया फैसला
बुधवार शाम करीब 4:40 बजे सभी 10 दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने पहले सभी आरोपियों की हाजिरी दर्ज कराई और फिर आईपीसी, यूएपीए, आर्म्स एक्ट तथा विस्फोटक अधिनियम की कुल 24 धाराएं पढ़कर सुनाईं। इसके बाद अदालत ने सभी दोषियों को मृत्युदंड सुनाने का आदेश दिया।

NIA और बचाव पक्ष की दलील
एनआईए की ओर से कहा गया कि यह केवल हत्या का मामला नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला था। अभियोजन पक्ष ने दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की।
वहीं बचाव पक्ष ने अदालत से मानवीय आधार पर सजा में राहत देने की अपील की। वकील ने दलील दी कि आरोपी पिछले 12 वर्षों से जेल में हैं और सरकार अन्य नक्सलियों के पुनर्वास की भी नीति अपना रही है।
रायपुर सेंट्रल जेल में हो सकती है फांसी
यदि हाईकोर्ट और उसके बाद सभी कानूनी प्रक्रियाओं के बाद मृत्युदंड बरकरार रहता है, तो दोषियों को जगदलपुर सेंट्रल जेल से रायपुर सेंट्रल जेल भेजा जाएगा। जगदलपुर जेल में फांसीघर, लीवर सिस्टम और जल्लाद की व्यवस्था नहीं है, जबकि छत्तीसगढ़ में फांसी देने की व्यवस्था केवल रायपुर सेंट्रल जेल में उपलब्ध है।
कोर्ट परिसर में रही कड़ी सुरक्षा
फैसले के दौरान कोर्ट परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। सभी आरोपियों को बख्तरबंद वाहनों में सेंट्रल जेल से अदालत लाया गया। अदालत के भीतर और बाहर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात रहे।
झीरम हमला क्यों था अहम
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। करीब 13 वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान 101 गवाहों के बयान और विभिन्न दस्तावेज अदालत में पेश किए गए।


