Dalha Pahad: वैसे तो छत्तीसगढ़ में घूमने लायक बहुत सी रोमांजित जगह है। इनमें जांजगीर-चांपा जिले का दल्हा पहाड़ आस्था और रोमांच का एक अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर अकलतरा तहसील के दल्हापोड़ी गांव में स्थित यह पहाड़ अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक मान्यताओं के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। लगभग 700 मीटर ऊंचे इस पहाड़ की चोटी से चारों ओर का विहंगम दृश्य देखने और प्रकृति के इस खूबसूरत नजारे का आनंद लेने के लिए सैलानी यहां खिंचे चले आते हैं।
आस्था का केंद्र और चमत्कारी सूर्यकुंड
दल्हा पहाड़ पर मुख्य रूप से नागपंचमी के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन होता है, इस बार नागपंचमी 17 अगस्त, सोमवार को पड़ रही है। यहां स्थित मुनि का आश्रम और ‘सूर्यकुंड’ श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। मान्यता है कि सूर्यकुंड का जल बारहों महीने अमृत के समान रहता है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि नागपंचमी के दिन इस कुंड का जल पीने से स्वास्थ्य उत्तम रहता है और किसी भी प्रकार की बीमारी से मुक्ति मिल जाती है।
देखें वीडियो- https://youtu.be/qFH5j8p6FzM
ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए बेहद रोमांचित करने वाला सफर
इस https://youtu.be/qFH5j8p6FzMपहाड़ की चोटी तक पहुंचने का सफर अपने आप में एक बड़ा रोमांच है। यदि आप यहां आ रहे हैं, तो आपको नैसर्गिक चट्टानों को पार करते हुए आगे बढ़ना पड़ेगा, जो ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए बेहद रोमांचित करने वाला अनुभव है। जंगल के रास्तों, कंटीले पौधों और पथरीली चट्टानों को पार करके ही शिखर तक लंबा सफर तय करना होता है, क्योंकि यहां न तो कोई सीढ़ियां हैं और न ही चढ़ाई के लिए कोई पक्का रास्ता। पहाड़ के चारों ओर कोटगढ़, पचरी, पंडरिया और पोड़ी गांव बसे हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस जंगली रास्ते में सांप भी रहते हैं, लेकिन ट्रैकिंग के शौकीन और श्रद्धालु आम दिनों में भी इस यात्रा का मोह नहीं छोड़ते।
शिखर का सुन्दर दृश्य और मानसून का जादू
जब दुर्गम रास्तों से होकर आप पहाड़ की चोटी पर पहुंचते हैं, तो वहां पहुंचने के बाद चारों तरफ दूर-दूर का खूबसूरत दृश्य देखकर सारी थकान मानो मिट सी जाती है। मानसून के समय जब बादल पहाड़ से टकराते हैं, तो वह पल लोगों के लिए किसी फिल्म के सीन से कम नहीं होता। प्रकृति का यह अद्भुत रूप हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है।![]()
यहां आने वालों के लिए विशेष सलाह
यह जगह जितनी सुंदर है, उतनी ही खतरनाक भी है क्योंकि थोड़ी सी चूक जीवन पर भारी पड़ सकती है। पहाड़ की दुर्गम चढ़ाई को देखते हुए अपनी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना जरूरी हो जाता है।
पहनावा और जूते: ट्रैकिंग के दौरान टाइट कपड़े न पहनें, आरामदायक कपड़े चुनें। हमेशा जूता पहनकर आएं जिससे चढ़ने में आसानी होगी। चप्पल बिल्कुल न पहनें क्योंकि रास्तों में बेहद ढलान है और इससे फिसलने या चोट लगने की दिक्कत हो सकती है।
पानी साथ रखें: ऊंचाई पर चढ़ते वक्त प्यास बहुत लगती है, इसलिए अपने साथ भरपूर पानी रखें। यदि दो लोग जा रहे हैं, तो कम से कम दो लीटर पानी अपने साथ अवश्य रखें।
सामान कम रखें: पहाड़ पर चढ़ते समय अपने साथ ज्यादा सामान न रखें। भारी सामान के साथ इतनी ऊंचाई चढ़ने में आपको ज्यादा थकान लग सकती है और सफर मुश्किल हो सकता है।
सुंदरता पर लगता कचरे का ग्रहण
इतनी अद्भुत और खूबसूरत जगह होने के बावजूद, यहां पर्यटकों की लापरवाही के कारण एक बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। दूर-दूर से आने वाले कई लोग इस सुंदर प्राकृतिक जगह पर भारी मात्रा में कचरा और प्लास्टिक फैला रहे हैं। जगह-जगह बिखरा हुआ यह कचरा न सिर्फ पहाड़ की पवित्रता और सुंदरता को खराब कर रहा है, बल्कि यहां के पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा बन गया है। पर्यटकों को यह समझने की आवश्यकता है कि ऐसी प्राकृतिक धरोहरों का आनंद लेने के साथ-साथ उन्हें स्वच्छ रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।
कैसे पहुंचें दल्हा पहाड़?
दल्हा पहाड़ पहुंचने के लिए यातायात के अच्छे साधन उपलब्ध हैं-
ट्रेन द्वारा: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन अकलतरा है। यहां से बलौदा मार्ग पर मात्र 7 किलोमीटर की दूरी तय करके दल्हापोड़ी गांव स्थित पहाड़ तक पहुंचा जा सकता है।
सड़क मार्ग द्वारा: सड़क मार्ग से आप जांजगीर-चांपा जिला मुख्यालय से अकलतरा होते हुए (लगभग 25 किलोमीटर की दूरी) यहां आ सकते हैं। इसके अलावा, आप बिलासपुर से अकलतरा होकर भी दल्हा पहाड़ आसानी से पहुंच सकते हैं।




