CG News: खदान सीमांकन को लेकर विवाद, ग्रामीणों ने किया विरोध; संचालक पर गंभीर आरोप

CG News: बलौदाबाजार जिले के सुहेला क्षेत्र के ग्राम बिटकुली में खदान की जमीन के सीमांकन को लेकर विवाद गहरा गया है। सीमांकन की प्रक्रिया शुरू होते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने खदान संचालक पर स्वीकृत सीमा से अधिक क्षेत्र में खनन करने और जमीन से जुड़े मामले में अनियमितता के आरोप लगाए हैं।tcw

सीमांकन के दौरान पहुंचे सैकड़ों ग्रामीण

जानकारी के अनुसार खदान संचालक रिपुसूदन वर्मा ने राजस्व अधिकारियों और पटवारी के साथ खदान भूमि के सीमांकन के लिए आवेदन किया था। सीमांकन की प्रक्रिया शुरू होते ही करीब 250 से 300 ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और विरोध जताने लगे। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान के लिए जितनी भूमि स्वीकृत की गई थी, उससे अधिक क्षेत्र में उत्खनन किया गया है।

स्वीकृति से अधिक खनन का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि खदान संचालन के लिए लगभग चार एकड़ भूमि की अनुमति दी गई थी, लेकिन करीब सात एकड़ क्षेत्र में खनन किया गया। इससे आसपास की भूमि भी प्रभावित हुई है।

ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी इसी स्थान पर अवैध कचरा डंपिंग और जमीन समतलीकरण का विरोध किया गया था। विरोध के बाद कचरा हटाया गया, लेकिन अब दोबारा सीमांकन की प्रक्रिया शुरू होने से लोगों में नाराजगी बढ़ गई है।

जमीन हस्तांतरण पर उठाए सवाल

ग्राम पंचायत के सरपंच दिनेश चौरे और पूर्व सरपंचों ने आरोप लगाया कि कई वर्षों से खदान संचालक द्वारा इसी भूमि को मंदिर निर्माण के नाम पर आवंटित किए जाने के लिए आवेदन किया जाता रहा है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि भूमि मंदिर निर्माण के लिए मांगी गई थी, तो वह निजी नाम पर कैसे दर्ज हो गई। उन्होंने पूरे राजस्व रिकॉर्ड और जमीन हस्तांतरण प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

खदान संचालक ने दी सफाई

वहीं खदान संचालक रिपुसूदन वर्मा का कहना है कि संबंधित भूमि उनके नाम पर दर्ज है और वह अपनी निजी जमीन का सीमांकन कराने पहुंचे थे।

थाने पहुंचे ग्रामीण

विरोध के दौरान ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण सुहेला थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराने की मांग की।

बाद में तहसीलदार और पुलिस अधिकारियों की समझाइश के बाद ग्रामीण शांत हुए और वापस लौट गए। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि चारागाह और शासकीय भूमि को खदान के लिए किसी भी स्थिति में उपयोग नहीं करने दिया जाएगा।

 

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