SIR: अभी नाम नहीं जुड़वाया तो अगली बार बढ़ेंगी मुश्किलें, देने होंगे ये सबूत

CG SIR Form:

SIR: मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) के तहत नाम जुड़वाने और दावा-आपत्ति दर्ज कराने के लिए अब सिर्फ तीन दिन शेष रह गए हैं। प्रारंभिक प्रकाशन के अनुसार छत्तीसगढ़ में कुल 27.40 लाख मतदाताओं के नाम कटे हैं, जिनमें करीब साढ़े छह लाख मृत मतदाता शामिल हैं। शेष 19 लाख में से अब तक केवल 1.43 लाख लोगों ने ही नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया है।

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि जो मतदाता इस बार एसआईआर में अपना नाम नहीं जुड़वाएंगे, उन्हें अगले एसआईआर में अधिक कठिन प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। उस समय न केवल नए दस्तावेज देने होंगे, बल्कि यह भी बताना होगा कि एसआईआर-2025 के दौरान उन्होंने आवेदन क्यों नहीं किया।

CG Voter List Update: छत्तीसगढ़ में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कार्यक्रम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदाता सूची में एक बार फिर बदलाव होने जा रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 27 लाख से अधिक नाम हटाए गए थे, जिसके बाद अब बड़ी संख्या में मतदाताओं ने दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करना शुरू कर दिया है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की ओर से नाम जुड़वाने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्रेरित करने के बाद भी आवेदनों की संख्या अब तक बेहद सीमित है। लोग आवेदन ही नहीं कर रहे हैं। आयोग के बूथ लेवल आफिसर के अलावा राजनीतिक पार्टियों के बीएलए भी लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। इसके बावजूद अभी 17 लाख से ज्यादा लोगों के आवेदन आयोग तक नहीं पहुंचे हैं।

22 के बाद आवेदन नहीं, सिर्फ सत्यापन

छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए निर्वाचन आयोग 22 जनवरी से 21 फरवरी तक विशेष सत्यापन अभियान चलाया जाएगा। सूची से कटे नाम, संशोधन इत्यादि की दावा आपत्तियों के अलावा 6.40 लाख मतदाता नो-मैपिंग वाले हैं। यानी बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) इन मतदाताओं तक पहुंच नहीं पाए।

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इसकी मुख्य वजह उनका पता नहीं मिलना, घर बंद होना या लंबे समय से निवास न होना बताया जा रहा है। निर्वाचन आयोग ने ऐसे सभी नो-मैपिंग मतदाताओं को नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस मिलने के बाद संबंधित मतदाता को निर्धारित समय सीमा के भीतर एसडीएम के समक्ष उपस्थित होकर 13 मान्य दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज पेश करना होगा।

इनमें आयोग की ओर से बताए गए 13 दस्तावेज शामिल हैं। एसडीएम स्तर पर दस्तावेजों की जांच के बाद ईआरओ (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) यह तय करेंगे कि मतदाता का नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाए या नहीं। यदि ईआरओ के निर्णय से मतदाता संतुष्ट नहीं होता है, तो उसे जिला कलेक्टर के पास अपील करने का अधिकार दिया गया है।

अगले एसआईआर में 2025 की मतदाता सूची बनेगी नाम जुड़वाने का आधार

अभी एसआईआर के लिए निर्वाचन आयोग 2003 के एसआईआर को आधार ले रहा है। सत्यापन के लिए यह देखा जा रहा है कि मतदाता का नाम 2003 के एसआईआर में है या नहीं। जिन लोगों के नाम 2003 की सूची में नहीं है, उन्हें अपने रिश्तेदारों के रिफरेंस देने पड़ रहे हैं।

रिश्तेदारों के नाम भी नहीं होने पर ऐसे लोगों को सी कैटेगरी में रखकर अलग से नोटिस जारी किया गया। उन्हें अब नाम जुड़वाने के लिए 13 तरह के दस्तावेजों में से कोई एक मांगा जा रहा है। ये दस्तावेज बहुत से लोगों के लिए सहज नहीं है। यही दिक्कत उन लोगों को बाद में आएगी जब अगला एसआईआर होगा।

भाजपा की मुख्य निर्वाचन अधिकारी से दावा-आपत्ति की समय-सीमा बढ़ाने की मांग

विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में नाम जोड़ने में लोगों को हो रही परेशानियों को लेकर भाजपा ने चुनाव आयोग से शिकायत की है। सोमवार को भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजयशंकर मिश्रा ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। इसमें ईआरओ और बीएलओ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दावा-आपत्ति की समय-सीमा 31 जनवरी तक बढ़ाने की मांग की गई है।

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