Narak Chaturdashi 2026: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। पांच दिवसीय दीपोत्सव में इस पर्व का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने से पापों का नाश होता है, आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है तथा व्यक्ति को नरक की यातनाओं से मुक्ति का पुण्य मिलता है।
अभ्यंग स्नान की परंपरा (Abhyang Snan 2026)
अभ्यंग स्नान सामान्य स्नान से अलग एक विशेष धार्मिक विधि है। इसमें सबसे पहले शरीर पर तिल, सरसों या अन्य उपयुक्त तेल से मालिश की जाती है। इसके बाद उबटन लगाकर कुछ समय तक रखा जाता है और फिर स्नान किया जाता है। मान्यता है कि इस विधि से किया गया स्नान शरीर और मन दोनों की शुद्धि करता है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान क्यों किया जाता है?
पौराणिक कथा के अनुसार, नरकासुर नामक असुर ने देवताओं और ऋषि-मुनियों को अत्यधिक परेशान कर रखा था। भगवान श्रीकृष्ण ने पत्नी सत्यभामा के साथ युद्ध कर नरकासुर का वध किया और संसार को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया।
मान्यता है कि युद्ध के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने तेल और उबटन से स्नान किया था। तभी से नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने की परंपरा चली आ रही है। इसे स्वास्थ्य, सौंदर्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
7 नवंबर 2026 का पंचांग
- त्रयोदशी तिथि – सुबह 10:49 बजे तक, इसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ
- चित्रा नक्षत्र – अगले दिन सुबह 5:53 बजे तक
- प्रीति योग – देर रात 3:28 बजे तक
- विशेष पर्व – नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली, धन्वंतरि जयंती और हनुमान जयंती
नरक चतुर्दशी 2026 शुभ मुहूर्त
- चतुर्दशी तिथि प्रारंभ – 7 नवंबर 2026, सुबह 10:47 बजे
- चतुर्दशी तिथि समाप्त – 8 नवंबर 2026, सुबह 11:27 बजे
- अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त – सुबह 5:41 बजे से 6:38 बजे तक
- चंद्रोदय – सुबह 5:41 बजे
राहुकाल
- दिल्ली – सुबह 9:21 से 10:43 बजे
- मुंबई – सुबह 9:32 से 10:57 बजे
- चंडीगढ़ – सुबह 9:25 से 10:45 बजे
- लखनऊ – सुबह 9:05 से 10:28 बजे
- भोपाल – सुबह 9:16 से 10:40 बजे
- कोलकाता – सुबह 8:32 से 9:56 बजे
- अहमदाबाद – सुबह 9:35 से 10:59 बजे
- चेन्नई – सुबह 8:59 से 10:26 बजे
सूर्योदय और सूर्यास्त
- सूर्योदय – सुबह 6:36 बजे
- सूर्यास्त – शाम 5:32 बजे
नरक चतुर्दशी का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन तेल में माता लक्ष्मी और सभी जल स्रोतों में मां गंगा का वास होता है। इसलिए तेल मालिश के बाद स्नान करने से धन, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कई स्थानों पर स्नान से पहले उबटन लगाने की भी परंपरा है।
नरक चतुर्दशी की शाम दक्षिण दिशा में नरकासुर के निमित्त चार दीपक जलाने का विधान है। साथ ही मंदिरों, घर के आंगन, बगीचों, मठों, अस्त्रागारों और नदी किनारे दीपदान करने से शुभ फल मिलने की मान्यता है।



