Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि 2026 के पावन पर्व में आज छठा दिन मां कात्यायनी की पूजा को समर्पित है। 10 अक्टूबर से शुरू हुए इस महापर्व में श्रद्धालु पूरे भक्तिभाव से माता के छठे स्वरूप की आराधना कर रहे हैं। मान्यता है कि मां कात्यायनी की कृपा से भय, शोक और रोगों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
घर-घर और मंदिरों में भक्तजन मां की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व माना गया है और भक्त पीले वस्त्र धारण कर माता को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं।
मां कात्यायनी की कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने उनके यहां पुत्री रूप में जन्म लिया, जिन्हें मां कात्यायनी कहा गया। उन्होंने महिषासुर का वध कर देवताओं को मुक्ति दिलाई, इसलिए उन्हें महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है।
माना जाता है कि मां कात्यायनी की पूजा से घर में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मां कात्यायनी की पूजन विधि (Maa Katyayani Pujan Vidhi)
छठे दिन की पूजा का शुभ समय प्रातःकाल माना जाता है.
1. स्नान और सफाई: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें. पूजा स्थल की सफाई कर गंगाजल से शुद्ध करें.
2. मूर्ति स्थापना: घर या मंदिर में मां कात्यायनी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें.
3. पूजा सामग्री: घी का दीपक जलाएं, रोली, अक्षत और पीले फूल अर्पित करें.
4. भोग अर्पण: मां को शहद या शहद से बनी खीर का भोग लगाएं.
5. मंत्र जाप और आरती: कात्यायनी मां के मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती उतारकर प्रसाद बाटें.
मां कात्यायनी के मंत्र (Maa Katyayani mantra)
मुख्य मंत्र:
कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी.
नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः.
स्तुति मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मंत्र जाप के दौरान घर में शांति का अनुभव होता है और भक्तों का मन चिंताओं से मुक्त होता है.
शुभ रंग और भोग
मां कात्यायनी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है. इस दिन पीले कपड़े पहनकर पूजा करना शुभ माना जाता है. भोग में शहद या शहद से बनी खीर अर्पित करना परंपरा है. छोटे-छोटे बच्चे भी अपने हाथों से मिठाई अर्पित कर माता की कृपा पाने का प्रयास करते हैं.
कात्यायनी माता की आरती
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी,
जय जगमाता, जग की महारानी।
बैजनाथ स्थान तुम्हारा,
वहां वरदाती नाम पुकारा।
कई नाम हैं, कई धाम हैं,
यह स्थान भी तो सुखधाम है।
हर मंदिर में जोत तुम्हारी,
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।
हर जगह उत्सव होते रहते,
हर मंदिर में भक्त हैं कहते।
कात्यायनी रक्षक काया की,
ग्रंथि काटे मोह माया की।
झूठे मोह से छुड़ाने वाली,
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।
जय जगमाता, जग की महारानी,
अपना नाम जपाने वाली।
बृहस्पतिवार को पूजा करियो,
ध्यान कात्यायनी का धरियो।
हर संकट को दूर करेगी,
भंडारे भरपूर करेगी।
जो भी मां को भक्त पुकारे,
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी,
जय जगमाता, जग की महारानी।


