Bastar Flood Update: बस्तर में चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव से हुई भारी बारिश के कारण इंद्रावती नदी उफान पर है। नदी का जलस्तर 50 साल के रिकॉर्ड को पार करते हुए 12.39 मीटर तक पहुंच गया। यह 9 जुलाई 1973 को दर्ज किए गए 12.18 मीटर के पुराने रिकॉर्ड से 21 सेंटीमीटर ज्यादा है।
जगदलपुर में बाढ़ की स्थिति को ड्रोन तस्वीरों में देखा गया, जिसमें कई निचले इलाके पानी से घिरे नजर आए। नदी का जलस्तर बढ़ने से तटीय और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया।
केंद्रीय जल आयोग ने जारी किया अलर्ट
केंद्रीय जल आयोग की एडवाइजरी के बाद प्रशासन ने एक बार फिर अलर्ट जारी किया है। अपस्ट्रीम क्षेत्रों से पानी की आवक और जलाशयों से पानी छोड़े जाने के कारण जगदलपुर में इंद्रावती नदी का जलस्तर 60 सेंटीमीटर से एक मीटर तक और बढ़ने की संभावना जताई गई है।
इंद्रावती नदी का खतरे का स्तर 8.3 मीटर है, जबकि वर्तमान में जलस्तर 12.39 मीटर तक पहुंच चुका है। प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से राहत शिविरों या सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
बाढ़ से कई गांवों का टूटा संपर्क
इंद्रावती नदी के बढ़े जलस्तर से बोड़ना और भेजापदर जैसे गांव पानी से घिर गए हैं। कई इलाकों में सड़क संपर्क भी टूट गया। जगदलपुर शहर के कुछ निचले हिस्सों में भी बाढ़ का पानी भर गया, जिसके बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
833 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जिला प्रशासन, एसडीआरएफ और अन्य बचाव दलों ने रेस्क्यू अभियान चलाया। इस दौरान 833 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। इनमें 821 लोगों को नावों के जरिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया, जबकि डोंगाघाट में फंसे 12 लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से बाहर निकाला गया।
65 राहत शिविरों में 8,894 लोग
बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए जिले में 65 राहत शिविर बनाए गए हैं। इन शिविरों में कुल 8,894 लोगों को ठहराया गया है। शहरी क्षेत्र के 8 शिविरों में 2,620 और ग्रामीण क्षेत्रों के 57 शिविरों में 6,274 लोग रह रहे हैं।
प्रशासन के अनुसार राहत शिविरों में प्रभावित लोगों के लिए भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां और स्वास्थ्य जांच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अधिकारियों और आपदा प्रबंधन टीमों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।




