CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि सेवानिवृत्ति के अंतिम वर्ष में कर्मचारी को उसके गृह जिले में पदस्थ किया जाना चाहिए। आबकारी विभाग के हेड कांस्टेबल की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उन्हें गृह जिले बिलासपुर में पोस्टिंग देने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारी को आदेश की प्रति मिलने के 15 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई कर पदस्थापना आदेश जारी करने के निर्देश दिए हैं।
गृह जिले में पोस्टिंग
याचिकाकर्ता वर्तमान में रायगढ़ जिले में पदस्थ हेड कांस्टेबल हैं। उन्होंने सेवानिवृत्ति करीब होने के कारण रायगढ़ से बिलासपुर स्थानांतरण की मांग की थी।
याचिका में उन्होंने वर्ष 2025 की स्थानांतरण नीति के प्रावधान का लाभ देने की मांग की थी। कोर्ट को बताया गया कि उनकी नियुक्ति 19 अप्रैल 1993 को आबकारी विभाग में सेल्समैन के पद पर हुई थी। बाद में उन्हें नियमित कर आबकारी आरक्षक बनाया गया।
इसके बाद वर्ष 2014 में उनका तबादला कोरबा से बिलासपुर किया गया था। 24 जून 2022 को उन्हें बिलासपुर से रायगढ़ भेजा गया। वर्ष 2023 में पदोन्नति के बाद भी वे रायगढ़ में ही पदस्थ रहे।
पत्नी की खराब तबीयत का दिया हवाला
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि वे जुलाई 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इसके साथ ही उनकी पत्नी की तबीयत भी खराब रहती है और उनका लगातार इलाज चल रहा है।
उन्होंने गृह जिले बिलासपुर में पदस्थापना के लिए विभाग को कई बार आवेदन दिए, लेकिन कोई निर्णय नहीं लिया गया।
सरकार की दलील को कोर्ट ने किया खारिज
राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि 5 जून 2025 की स्थानांतरण नीति आबकारी विभाग पर लागू नहीं होती। सरकार ने कहा कि कर्मचारी को अपनी पसंद की जगह पोस्टिंग पाने का अधिकार नहीं है।
हाईकोर्ट ने सरकार के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी की सेवानिवृत्ति को देखते हुए उसे अंतिम वर्ष में गृह जिले में पदस्थ किया जाना उचित है।
