CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस होंगे मोहपात्रा, जस्टिस संजय अग्रवाल राजस्थान जाएंगे

CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जल्द बड़ा प्रशासनिक बदलाव होने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने ओडिशा हाईकोर्ट के जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का नया चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश की है। वहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की अनुशंसा की गई है।

CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जल्द बड़ा प्रशासनिक बदलाव होने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने ओडिशा हाईकोर्ट के जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का नया चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश की है। वहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की अनुशंसा की गई है।

मौजूदा चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा 4 सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके रिटायरमेंट के बाद जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की जिम्मेदारी संभालेंगे।

हाईकोर्ट में होंगे कई बदलाव

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने न्यायिक व्यवस्था में कई अहम बदलावों की सिफारिश की है। जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा का ओडिशा हाईकोर्ट से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तबादला करते हुए उन्हें यहां का चीफ जस्टिस बनाने की अनुशंसा की गई है।

वहीं, जस्टिस संजय के. अग्रवाल को पदोन्नति देकर राजस्थान हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस अल्पेश यशवंत कागजी को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की भी अनुशंसा की गई है।

3 नए जजों की नियुक्ति की भी सिफारिश

कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की भी अनुशंसा की है। बेंच कोटे से न्यायिक अधिकारी संतोष शर्मा, सुषमा सावंत और सुधीर कुमार के नाम प्रस्तावित किए गए हैं। इन नियुक्तियों के बाद हाईकोर्ट की न्यायिक व्यवस्था में कई बदलाव देखने को मिलेंगे।

कौन हैं जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा

जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा का जन्म 18 अप्रैल 1965 को हुआ था। उन्होंने B.A. और LLB की पढ़ाई पूरी करने के बाद 7 फरवरी 1988 को ओडिशा स्टेट बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया। करीब 26 वर्षों तक उन्होंने सिविल, सेवा, आपराधिक और संवैधानिक मामलों की पैरवी की।

उन्हें अभिभावक एवं आश्रित अधिनियम, हिंदू अल्पसंख्यक एवं संरक्षकता अधिनियम, हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम से जुड़े मामलों का भी व्यापक अनुभव है। वे ओडिशा सरकार और ओडिशा लोक सेवा आयोग के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता भी रह चुके हैं तथा कई सरकारी संस्थानों की ओर से अदालत में पैरवी कर चुके हैं।

 

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