CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य सरकार ने अभी तक इस कानून के प्रवर्तन की तिथि अधिसूचित नहीं की है, ऐसे में इस स्तर पर इसे चुनौती देना समय से पहले है।
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याचिका में लगाए गए थे ये तर्क
याचिकाकर्ता अमरजीत पटेल ने अधिवक्ता ज्ञानेंद्र कुमार महिलांग के माध्यम से याचिका दायर करते हुए कहा था कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 21, 25 और 29 का उल्लंघन करता है। याचिका में इसे धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत चयन के अधिकारों पर प्रतिबंध लगाने वाला बताया गया था।
राज्य सरकार ने दी आपत्ति
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने याचिका की ग्राह्यता पर सवाल उठाते हुए इसे खारिज करने की मांग की। कोर्ट ने राज्य के तर्कों को स्वीकार करते हुए याचिका निरस्त कर दी।
कानून में सख्त सजा का प्रावधान
धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को 19 मार्च 2026 को विधानसभा से पारित किया गया था और 10 अप्रैल को इसकी अधिसूचना जारी हुई थी। इस कानून में जबरन, प्रलोभन या धोखाधड़ी से धर्मांतरण कराने पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।
एक और याचिका लंबित
बताया जा रहा है कि मसीही समाज के प्रतिनिधि क्रिस्टोफर पॉल ने भी इस कानून को चुनौती देते हुए अलग याचिका दायर की है, जिस पर हाईकोर्ट में सुनवाई अभी बाकी है।
CG News: धर्म स्वातंत्र्य कानून राजपत्र में प्रकाशित, जानिए सजा का प्रावधान



