Chaitra Navratri 2026: शक्ति उपासना के महापर्व चैत्र नवरात्रि 2026की शुरुआत इस बार गुरुवार से हो रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन माता रानी डोली पर सवार होकर आ रही हैं। शास्त्रों में डोली पर आगमन को महामारी या संघर्ष का संकेत माना जाता है, जो लोगों को सतर्क रहने का संदेश देता है। हालांकि माता का प्रस्थान हाथी पर होगा, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। (मातारानी डोली आगमन)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हाथी पर माता का प्रस्थान अच्छी वर्षा, बेहतर कृषि उत्पादन, समृद्धि और आर्थिक उन्नति का प्रतीक होता है। ऐसे में भक्तों के लिए यह संकेत सुखद माना जा रहा है।

72 साल बाद बन रहा खास ज्योतिषीय संयोग (Navratri Shubh Muhurat)
राजनांदगांव के ज्योतिषाचार्य भोला पंडित के अनुसार करीब 72 वर्षों बाद एक विशेष ज्योतिषीय संयोग बन रहा है। इस बार अमावस्या तिथि के प्रभाव में ही कलश स्थापना की जाएगी। 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलने वाले इस पर्व में प्रतिपदा तिथि की क्षय होने के बावजूद नवरात्र पूरे नौ दिनों तक मनाई जाएगी, जिसे आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद फलदायी माना जाता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होगी। हालांकि सूर्योदय अमावस्या तिथि में होने के कारण शास्त्र सम्मत विधि से उसी समय घट स्थापना का विधान रहेगा। इस दिन शुक्ल, ब्रह्म और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष संयोग भी बनेगा, जिसे बेहद शुभ माना जा रहा है।

कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त (मातारानी डोली आगमन)
नवरात्रि के पहले दिन 19 मार्च को कलश स्थापना के लिए दो प्रमुख शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन स्थिर लग्नों में घट स्थापना करने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
• सुबह 6:02 बजे से 8:40 बजे तक
• सुबह 9:16 बजे से 10:56 बजे तक

सेवा पंडालों की तैयारी शुरू
नवरात्रि के दौरान हर साल की तरह इस बार भी माँ बमलेश्वरी जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए दुर्ग के अंजोरा से लेकर डोंगरगढ़ तक सेवा पंडाल लगाए जाएंगे। मंदिर समिति और सेवादारों ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। वहीं जिला प्रशासन ने भी बैठक लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और रूट व्यवस्था को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं।
